गौरव भाषा का होता है, या उसके इस्तेमाल से मिली कामयाबी का?
Автор: INDIA-AAJKAL | इंडिया-आजकल
Загружено: 2025-11-29
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किसी भी इलाके के लिए क्षेत्रीय बोली को भाषा बनाना, फिर भाषा को राजभाषा बनाना स्थानीय भावनाओं के लिए बहुत बड़ी बात होती है। छत्तीसगढ़ में यह बात 2007 में हो गई, जब डॉ.रमन सिंह मुख्यमंत्री थे, और छत्तीसगढ़ी राजभाषा विधेयक पास किया गया था। तब से अब तक पौने दो दशक हो गए हैं, लेकिन अभी तक बोली से भाषा का सफर सिर्फ कागज पर तय हुआ है। आगे भविष्य क्या है? क्या छत्तीसगढ़ी में पढ़ाई से लोगों का भविष्य आज के मुकाबले बेहतर हो सकेगा? सवाल भाषा को लेकर भावना के बजाय रोजी-रोटी का नहीं होना चाहिए? क्या भूख और भावना दोनों का पेट एक साथ भर सकता है?
‘छत्तीसगढ़’ अखबार के संपादक सुनील कुमार का यह वीडिटोरियल देखें।
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