आशा ही रो पड़ी... जब पीड़ा जुबां पर आई
Автор: ANJUM SAMACHAR
Загружено: 2025-12-30
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राज्य की आशा सहयोगिनियों का दर्द आज खुलकर सामने आया। अपनी पीड़ा बताते-बताते कई आशा सहयोगिनियां भावुक हो गईं और उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े।
श्रीगंगानगर में आज वह दृश्य देखने को मिला, जिसने हर किसी को भावुक कर दिया। वर्षों से गांव-गांव और शहरों में घर-घर जाकर स्वास्थ्य सेवाएं देने वाली आशा सहयोगिनियां अपनी व्यथा बताते-बताते रो पड़ीं। किसी ने कहा “हम दिन-रात काम करते हैं, लेकिन परिवार चलाना मुश्किल हो गया है,” तो किसी ने अपनी असुरक्षित भविष्य को लेकर चिंता जताई।
आशा सहयोगिनियों ने जिला कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजते हुए मानदेय बढ़ाकर 20 हजार रुपये प्रतिमाह, 500 रुपये मोबाइल रिचार्ज भत्ता, एनएचएम में 10 प्रतिशत आरक्षण, राज्यकर्मियों की तर्ज पर सामाजिक सुरक्षा, डिजिटल बीमा योजना, पदोन्नति में अवसर, दुर्घटना या मृत्यु पर सहायता तथा पेंशन सुविधा जैसी 8 प्रमुख मांगें रखीं।
आशा सहयोगिनियों का कहना है कि वे सरकार की स्वास्थ्य योजनाओं की मजबूत कड़ी हैं, लेकिन आज वही आशाएं खुद न्याय की उम्मीद में सरकार की ओर देख रही हैं।
अब सवाल यह है कि क्या सरकार इन आंसुओं की आवाज सुनेगी और आशा सहयोगिनियों को उनका हक दिलाएगी, या फिर उनका संघर्ष यूं ही जारी रहेगा।
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