रविवार इतवार स्पेशल भक्ति भजन संगीत SundaySpecial Bhakti Bhajan Sangeet
Автор: abssuniljat
Загружено: 2025-08-23
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रविवार इतवार स्पेशल भक्ति भजन संगीत Sunday
Special Bhakti Bhajan Sangeet
रविवार इतवार स्पेशल भक्ति भजन संगीत Sunday SpecialBhakti Bhajan Sangeet
सूर्य (Sun) की ब्रह्मांडीय किरणों के बिना पृथ्वी पर जीवन कीकल्पना भी असंभव है। संसार की जीवन रेखा माने जाने वालेभगवान सूर्य की पूजा करना कोई नई बात नहीं है। प्राचीन काल से हीहिंदू धर्म के अनुयायी प्रत्यक्ष देवता भगवान सूर्य की पूजा करते आ रहेहैं, जिनकी ऊर्जा से ही जीवन का अस्तित्व है। भारत में हर साल सूर्यसे संबंधित कई त्योहार मनाए जाते हैं, जिनमें रविवार व्रत (SundayFast) का विशेष महत्व है। यह व्रत भगवान सूर्य को प्रसन्न करने केलिए किया जाता है, जो समस्त ब्रह्मांड को प्रकाश और ऊज्जा प्रदानकरने वाले देविता माने जाते हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसव्रत के माध्यम से भक्त बुद्धि, साहस, स्वास्थ्य, आत्मविश्वास, प्रतिरक्षा,और जीवन में सफलता जैसे अनमोल वरदान प्राप्त कर सकते हैं। सूर्यदेव को विभिन्न नामों से पुकारा जाता है, जिनमें 'रविं' भी एक प्रसिद्धनाम है। इसलिए, उनके दिन को 'रविवार' कहा जाता है। भगवान सूर्यको सूर्य नारायण के नाम से भी जाना जाता है और वे हिंदू देवताओं मेंसबसे पूजनीय माने जाते हैं।
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शुक्रवार स्पेशल भक्ति भजन संगीत (Friday Special BhaktiBhajan Sangeet)
हिंदू धर्म में शुक्रवार का दिन धन की देवी माता लक्ष्मी को समर्पित है।इस दिन मां लक्ष्मी और शुक्र ग्रह की पूजा की जाती है। शुक्रवार केदिन माता लक्ष्मी के मधुर भजन सुनने से पूरा दिन मंगलमय जाता है।इसके साथ इस दिन विधिवत लक्ष्मी माता की पूजा करने से साधकपर सदा मां की कृपा बनी रहती है। अधिकतक भजन भी दिन केअनुसार सुनते हैं। बहुत से लोग शुक्रवार के दिन माता लक्ष्मी के भजनसुनना ज्यादा पसंद करते हैं, इसलिए आज हम आपके लिए लेकरआए हैं, यहां पर शुक्रवार स्पेशल भजन संगीत
Subtitles:
ॐ जय लक्ष्मी माता 00.05
जय देवी महालक्ष्मी 03.06
तेरे दर पे माँ लक्ष्मी 05.34आजा माँ लक्ष्मी10.05
सुन ले माँ लक्ष्मी पुकार 14.45जय जय महालक्ष्मी माता 19.05
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आसय शारण करतम दया,ॐ श्रऽ गणेशाये नमः
यज्ञस, ज़पस, व्यवहारसई,ग्वड़ छीय स्वरान प्रथ कारसई,कारस अनान छुख चई जमा,ॐ श्रS गणेशार्ये नमः:
मूषक च्ये वाहन शूभवुन,त्रयनलूकनई मंज़ फेरवुनमदतस म्ये रोज़तम प्रथ दमा,ॐ श्रऽ गणेशाये नमः
चुई छुख ज़गतुक आदिदीव,"कामदीव
चई छुख लछबद्य
स्यद कर च वञ म्यऽञ कामना,ॐ श्रऽ गणेशाय नमः
प्रारान छसय ब हा डेडि तल,आलव म्यून गोवई ना कनन
कन्न थाव वननुक छुम तमाह,ॐ श्रऽ गणेशाये नमः
गणपत गणेश्वर ही प्रभु,कलिराज़ राज़न हुन्द व्यभुपजि लोल पादन तल प्यमा,ॐ श्रS गणेशाये नमः
ग्वड़न्युक च्ये छुया आधिकार,कलिकालकुय छुख ताजदार
राज़स परण पादन प्यमा,ॐॐ श्रS गणेशाये नमः:
बाह नाव सुन्दर शूभवज,त्र्यनलूकन मंज़ बोलवज
पूरण करुम पूरण कृपा,ॐ श्रs गुणेशाये नमः
॥अथ श्री गणपति द्वादश नाम स्तोत्रम्॥
सुमुखश्रैकदन्तश्व कपिलो गजकर्णकः।लम्बोदरश्न विकटो विघ्ननाशो विनायकः ।॥
प्रणम्य शिरसा देवं गौरीपुत्रं विनायकम्।स्मरेन्नित्यमायु:कामार्थसिद्धये।॥
भक्तावासं
प्रथमं वक्रतुण्डं च एकदन्तं दि्वितीयकम्।तृतीयं कृष्णपिंगाक्षं गजवक्त्रं चतुर्थकम् ॥।
लम्बोदरं पंचमं च षष्ठ विकटमेव च।सप्तमं विध्नराजं च धूम्रवर्णं तथाष्ट्मम्।।
नवमं भालचन्द्रं च दशमं तु विनायकम्।एकादरश गणपरति द्वादशं तु गजाननम् ।
द्वादशैतानि नामानि त्रिसन्ध्यं यः पठेक्नर:।न च विघ्नभयं तस्य सर्वसिद्धिकरं प्रभो।॥
विद्यार्थी लभते विद्यां धनार्थी लभते धनम्।पुत्रार्थी लभते पुत्रान् मोक्षार्थी लभते गतिम्।
जपेद् गणपतिस्तोत्रं षड्भिमासिः फलं लभेत्।संवत्सरेण च संसिद्धि लभते नात्र संशयः ॥
अष्टभ्यो ब्राहुणेभ्यश्र लिखित्वा यः समर्पयित्।तस्य विद्या भवेतु सर्वा गणेशस्य प्रसादतः ॥
॥इतिश्रीनारदपुराणे संकटनाशननाम गणेशद्धादशनामस्तोत्रं सम्पूर्णम्।।
धूम्रकेतुर्गणाध्यक्षो भालचन्द्रो गजाननः।द्वादशैतानि नामानि यः पठेच्छणुयादपि॥
विद्यारम्भे विवाहे च प्रवेशे निर्गमे तथा।संग्रामे संकटे चैव विघ्नस्तस्य न जायते॥
सुन्दर मुख वाले, एकदन्त, कपिल, गजकर्णक, लम्बोदर, विकट,विघ्ननाश, विनायक, धूम्रकेतु, गणाध्यक्ष, भालचन्द्र और गजानन -गणपति के इन बारह नामों का विद्यारम्भकाल में, विवाह के समय,प्रवेश के समय, प्रस्थान के समय, संग्राम के समय अथवा संकट केसमय जो व्यक्ति पठन अथवा श्रवण करता है उसके समक्ष कभीकिसी प्रकार का विघ्न नहीं उपस्थित होता॥
॥अथ श्री गणेशस्तोत्रम् ॥
नारद उवाच
प्रणम्य शिरसा देवं गौरीपुत्र विनायकम्।भक्तावासं स्मरेन्रित्यमायु:कामार्थसिद्धये।॥
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