14 जनवरी मकर संक्रांति पर खिचड़ी की ये विधि कर ली तो धन खुद चलकर आएगा!
Автор: Sanatani Guru Gyan
Загружено: 2026-01-13
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14 जनवरी मकर संक्रांति पर खिचड़ी की ये विधि कर ली तो धन खुद चलकर आएगा!
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बहुत से लोग कहते हैं कि हम हर साल दान करते हैं, पूजा करते हैं, व्रत रखते हैं, फिर भी जीवन में सुख-शांति क्यों नहीं आती? भक्तों, इसका कारण केवल एक होता है — दान किया, पर भाव नहीं दिया। शास्त्र कहते हैं कि बिना श्रद्धा के किया गया दान केवल सामान का स्थान परिवर्तन है, पुण्य का सृजन नहीं। जब आपके हाथ से वस्तु निकलती है तो उसके साथ आपका अहंकार, आपकी कंजूसी और आपका लोभ भी निकलना चाहिए। यदि दान करते समय मन में दिखावा, गणना या अपमान की भावना आ जाए तो समझ लीजिए कि दान का फल उसी क्षण नष्ट हो गया।
इसलिए 14 जनवरी को जब आप तिल, गुड़, कच्चा अन्न, वस्त्र या चप्पल का दान करें तो एक बात का विशेष ध्यान रखें — दान देकर सामने वाले को छोटा न समझें, बल्कि उसे ईश्वर का स्वरूप मानें। उसके हाथ में वस्तु देते समय मन ही मन कहें — “हे प्रभु, यह सब आपका ही दिया हुआ है, मैं केवल आपके दिए को आपके ही बच्चे तक पहुँचा रहा हूँ।” यह भाव ही दान को महादान बनाता है।
भक्तों, आज का दिन केवल खिचड़ी, तिलगुड़ या व्रत का नाम नहीं है। यह आत्मचिंतन का दिन है। यह वह क्षण है जब भगवान यह देखते हैं कि आप डर से निर्णय लेते हैं या विवेक से। आप अंधी परंपरा निभाते हैं या समझदारी से धर्म का पालन करते हैं। इसलिए 14 जनवरी को तीन काम अवश्य करें —
पहला, चावल से बनी पक्की खिचड़ी न पकाएँ।
दूसरा, फलाहारी खिचड़ी या तिल–गुड़ का प्रसाद बनाकर भगवान को अर्पित करें।
तीसरा, कच्चे अन्न और तिल का दान करके किसी जरूरतमंद के चेहरे की मुस्कान का कारण बनें।
याद रखिए भक्तों — धर्म का सार भय नहीं, करुणा और ज्ञान है। जो निर्णय ज्ञान पर आधारित होता है, वही आपको पाप से भी बचाता है और पुण्य के द्वार भी खोलता है। आपने आज यह बात सुनी, समझी और उस पर विचार किया — बस यहीं से आपके जीवन में शुभ परिवर्तन शुरू हो चुका है।
पहला, चावल से बनी पक्की खिचड़ी न पकाएँ।
दूसरा, फलाहारी खिचड़ी या तिल–गुड़ का प्रसाद बनाकर भगवान को अर्पित करें।
तीसरा, कच्चे अन्न और तिल का दान करके किसी जरूरतमंद के चेहरे की मुस्कान का कारण बनें।
याद रखिए भक्तों — धर्म का सार भय नहीं, करुणा और ज्ञान है। जो निर्णय ज्ञान पर आधारित होता है, वही आपको पाप से भी बचाता है और पुण्य के द्वार भी खोलता है। आपने आज यह बात सुनी, समझी और उस पर विचार किया — बस यहीं से आपके जीवन में शुभ परिवर्तन शुरू हो चुका है।
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