BHAGAVAD GITA (Chapter 18) DAY 67
Автор: ISHWARANANDA
Загружено: 2026-01-07
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यदहङ्कारमाश्रित्य न योत्स्य इति मन्यसे |
मिथ्यैष व्यवसायस्ते प्रकृतिस्त्वां नियोक्ष्यति || 59||
स्वभावजेन कौन्तेय निबद्ध: स्वेन कर्मणा |
कर्तुं नेच्छसि यन्मोहात्करिष्यस्यवशोऽपि तत् || 60||
ईश्वर: सर्वभूतानां हृद्देशेऽर्जुन तिष्ठति |
भ्रामयन्सर्वभूतानि यन्त्रारूढानि मायया || 61||
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