Shiv Ashtak - शिव अष्टक - Somwar Ashtak by Shri Manik Prabhu Maharaj (सोमवार अष्टक)
Автор: Manik Prabhu
Загружено: 2020-05-04
Просмотров: 43836
Somwar Ashtak - Shri Manik Prabhu Maharaj Sung by Shri Anandraj Manik Prabhu
अर्थ: हे परमपुरुष, परमेश्वर, पर से भी अतीत अर्थात् परात्पर, श्रेष्ठ भगवान् शंकर, परमदिव्य, गार्हपत्य, आहवनीय, दक्षिणाग्नि, सभ्य, अवसत्य आदि पाँचों अग्नियों के वैभव, पर से भी अतीत, पार्वती के पति, शिवशंकर, श्रीहर तुम्हारे स्वरूप का रहस्य ब्रह्मादि देवता भी नहीं पा सकते॥1॥
त्रिपुरासुर का वध करनेवाले, तीन नेत्रोंवाले, आध्यात्मिक, आधिदैविक, आधिभौतिक आदि तीनों तापों का लोप करनेवाले, ज्ञाता, ज्ञान, ज्ञेय आदि त्रिपुटियों के बीज, जागृति, स्वप्न, सुषुप्ति आदि तीनों अवस्थाओं के साक्षी, पृथ्वी, स्वर्ग और पातालादि तीनों लोकों में व्याप्त, एकादश रुद्र, आठ वसु, द्वादश आदित्य, इंद्र और प्रजापति इन तेहतीस प्रकार (कोटि) के देवता जिसके चरणों में तल्लीन रहते हैं, ऐसे शिवशंकर, श्रीहर तुम्हारे स्वरूप का रहस्य ब्रह्मादि देवता भी नहीं पा सकते॥2॥
जिसके माथे पर चंद्र शोभायमान है, जिसने शरीर पर चिताभस्म धारण किया है, जो वायुभक्ष्य अर्थात् सर्पों के आभूषण धारण करता है, जिसका शरीर अत्यंत भव्य है, जिसका मुख अत्यंत दिव्य है, जो करोड़ों सूर्यों से अधिक तेजस्वी है, जिसने अपने भक्त भस्मासुर को वर दिया, जो भवभंजन है और संसार के ताप का निवारण करनेवाला है, ऐसे शिवशंकर, श्रीहर तुम्हारे स्वरूप का रहस्य ब्रह्मादि देवता भी नहीं पा सकते॥3॥
समुद्रमंथन से निकले विष को पीने के कारण जिसका कंठ नीला हो गया है, जिसने अपने कानों में सर्पों को कुंडल की भाँति धारण किया है, जिसने हाथों में चमड़े की म्यान पकड़ रखी है, जो अत्यंत दयालु है, जिसने नरकपाल को भिक्षापात्र की भाँति धारण कर रखा है, जिसके शरीर का वर्ण कर्पूर के समान कांतिमय है, जो काशी नगरी का अधिपति है, जो कैलास का स्वामी है, जिसने कालिका देवी का पाणिग्रहण किया है, ऐसे शिवशंकर, श्रीहर तुम्हारे स्वरूप का रहस्य ब्रह्मादि देवता भी नहीं पा सकते॥4॥
देवों के देव महादेव, शासन करनेवालों में श्रेष्ठ महेश, कामदेव के गर्व का हरण करनेवाले, भगवान् विष्णु के अत्यंत प्रिय, उनचास मरुतों में सर्वश्रेष्ठ मरुत, मुनियों के मन को आह्लादित करनेवाले, मद और मत्सररूपी दिग्गज पहलवानों को मार गिरानेवाले, भक्तजनों के मन को हरनेवाले, ऐसे शिवशंकर, श्रीहर तुम्हारे स्वरूप का रहस्य ब्रह्मादि देवता भी नहीं पा सकते॥5॥
भगवती पार्वतीसहित विराजमान - सांब, सदैव कल्याण करनेवाले सदाशिव, शक्ति के पति, षण्मुख के पिता, यच्चयावत् सृष्टि का संहार करनेवाले, शरणागत के रक्षक, देवताओं द्वारा स्मरण किए जाने पर उनकी सहायता करनेवाले, ऐसे शिवशंकर, श्रीहर तुम्हारे स्वरूप का रहस्य ब्रह्मादि देवता भी नहीं पा सकते॥6॥
विश्व के शासक - विश्वेश्वर, विश्व के पालनहार, विश्व के बाहर भी व्याप्त, विश्व के अंदर भी व्याप्त, विष का भक्षण करनेवाले, विघ्नों का नाश करनेवाले, स्वयं विजय प्राप्त करनेवाले एवं अपने भक्तों को विजय दिलवानेवाले, विश्व का भरण-पोषण करनेवाले, वीरभद्रस्वरूप, वीरों में सर्वश्रेष्ठ वीर, ब्रह्माजी द्वारा पूजित एवं पृथ्वी ही जिनका स्वरूप है (भूलिंग) ऐसे शिवशंकर, श्रीहर तुम्हारे स्वरूप का रहस्य ब्रह्मादि देवता भी नहीं पा सकते॥7॥
निराकार, निष्कलंक, जिनके स्वरूप में किसी प्रकार की भ्रांति नहीं है, जो सत्त्व, रज, तम इन तीनों गुणों से परे हैं, जिनमें सुख-दु:ख, राग-द्वेषादि द्वंद्व नहीं हैं, जो अपने ही स्वरूप के आनंद की गहराई (निविड़) में निमग्न हैं, जो नित्य नूतन हैं, ऐसे शिवशंकर, श्रीहर तुम अपने दास नरहरि को अपने चरणों में स्थान प्रदान करो, उसे दूसरा जन्म न लेना पड़े ऐसी मुक्ति प्रदान करो, हे शंकर तुम्हारे स्वरूप का रहस्य ब्रह्मादि देवता भी नहीं पा सकते॥8॥
Доступные форматы для скачивания:
Скачать видео mp4
-
Информация по загрузке: