सत्ता ढांचा बीजेपी के पक्ष में, और विपक्ष अब भी भ्रम में
Автор: Harkara हरकारा
Загружено: 2025-11-18
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हरकारा डीप डाइव के इस बातचीत में निधीश त्यागी और प्रोफ़ेसर आनंद तेलतुंबडे बिहार चुनाव के नतीजों से आगे बढ़कर पूरे भारतीय लोकतंत्र की हालत पर बात करते हैं.
चुनाव आयोग पर कब्ज़ा, विपक्ष की कमज़ोर रणनीति, जनता के आंदोलन, दलित और पिछड़ी राजनीति, वैश्विक पूँजीवाद और नई पीढ़ी की भूमिका.
सबकुछ एक धागे में जोड़ा गया है.
प्रो. तेलतुंबडे बताते हैं कि जब चुनाव आयोग और अदालत जैसे संस्थान सत्ता के असर में आ जाएँ तो सिर्फ़ मतदान से लोकतंत्र नहीं बचता. वे यह भी समझाते हैं कि विपक्ष ने क्यों समय रहते ठोस आंदोलन खड़ा नहीं किया, और क्यों किसान आंदोलन और सीएए विरोध ने जनता की ताक़त तो दिखाई, पर राजनीतिक दल उससे सीख नहीं सके.
बात आगे बढ़कर वैश्विक स्तर तक जाती है. पूँजीवाद और नई आर्थिक नीतियों की असफलता, दुनिया भर में बढ़ती तानाशाही प्रवृत्तियाँ और भारत की खास स्थिति, जहाँ सौ साल की तैयारी के साथ एक संगठित विचारधारा सत्ता में आई है.
दलित और पिछड़ी राजनीति, “अंबेडकरवादी” दलों की भूमिका, और नौजवान पीढ़ी की उदासीनता पर भी साफ़ और कड़वी बात होती है.
अगर आप समझना चाहते हैं कि सिर्फ़ सीटें जीतना या हारना नहीं, बल्कि पूरी चुनावी प्रक्रिया ही कैसे बदल दी गई है, तो यह बातचीत आपके लिए है.
पढ़िए प्रो. आनंद तेलतुंबडे के ये दो आर्टिकल:
https://scroll.in/article/1088405/ana...
https://thewire.in/politics/the-busin...
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