अस्तबली पीर का अखाड़ा
Автор: माता काली दरबार guddu bhagtji
Загружено: 2025-11-12
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अस्तबली पीर की कहानी (या "सबल सिंह बावरी" की कहानी) मुगलों के खिलाफ लड़ने वाले बावरी समुदाय के वीर सदस्यों से जुड़ी है, जिनकी बहादुरी की गाथाएं आज भी सुनाई जाती हैं। यह कहानी एक वीर योद्धा सबल सिंह बावरी की है, जो अपने भाइयो के साथ मिलकर मुगलों से लोहा लेते थे। इस कथा में हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक भी दर्शाया गया है।
शुरुआत: जब मुगलों ने शासन किया, तो उन्होंने हिंदुओं और मुसलमानों पर अत्याचार किए। इस अन्याय के खिलाफ बावरी समुदाय के कई लोगों ने विरोध करने की ठानी।
सबल सिंह का संघर्ष: सबल सिंह और उनके भाई हरी सिंह, केसरमल, अजीतमल और बाबा जाफरमल, मुगलों के अत्याचार के खिलाफ खड़े हुए।
मुगलों का घेरना: सोनीपत के मुरथल में मुगलों ने इन सभी बावरियों को घेर लिया और
शक्ति: कहा जाता है कि सिर कटने के बाद भी, वे लोग मुगलों से लड़ते रहे, जिससे उनकी बहादुरी और शक्ति का प्रमाण मिलता है।
परिवर्तन: एक कथा के अनुसार, जब एक बावरी परिवार का सदस्य शेर सिंह आग की धूणी में गया, तो उसका रंग काला हो गया, लेकिन उसे धूणी की अपार शक्ति मिल गई और उसका नाम सबल सिंह बावरी पड़ा।
हिंदू-मुस्लिम एकता: यह भी कहा जाता है कि अस्तबली पीर हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक हैं।
आज भी श्रद्धा: आज भी लोग अस्तबली पीर की मजार पर मन्नत मांगने आते हैं और उनकी दरगाह पर मेला लगता है।
यह कहानी वीर योद्धा सबल सिंह बावरी की है जिन्होंने मुगलों का डटकर सामना किया और अपनी बहादुरी से अपनी पहचान बनाई #trendingshorts #kali #videoviral #7289073342 #mata #astrology #live #darbar #vastuexpert
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