युग धर्म, “मैं कौन हूँ?” और दर्शन पर गुरुदेव के वचन | स्वामी श्री केशवानंद जी सरस्वती
Автор: Paramhans Ashram Vrindavan
Загружено: 2026-01-07
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इस दिव्य प्रवचन में स्वामी श्री केशवानंद जी सरस्वती ने युग धर्म, “मैं कौन हूँ?” जैसे आत्म-प्रश्न, और दर्शन के गूढ़ अर्थ पर अत्यंत सारगर्भित श्रीवचन दिए हैं।
गुरुदेव बताते हैं कि हर युग में साधक का धर्म अलग रूप में प्रकट होता है, लेकिन आत्म-जागरण का मार्ग वही रहता है—अपने भीतर सत्य को पहचानना।
इस प्रवचन में आप सुनेंगे:
🌿 युग धर्म का वास्तविक अर्थ और आज के समय में साधक की दिशा
🌿 “मैं कौन हूँ?”—प्रश्न नहीं, आत्म-अनुभव की शुरुआत
🌿 दर्शन का अर्थ केवल देखना नहीं, अंदर से जागना है
🌿 साधक की आंतरिक स्थिति और साधना की सही दृष्टि
यह वीडियो उन सभी साधकों के लिए उपयोगी है जो भक्ति के साथ आत्मचिंतन और दर्शन-बोध को समझना चाहते हैं।
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