दुख जीवन से नहीं, सोच से पैदा होता है | भोलेनाथ का संदेश
Автор: Rahasya kunj
Загружено: 2026-01-11
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दुख जीवन की घटनाओं से नहीं बढ़ता,
दुख तब बढ़ता है जब मनुष्य
उसे स्वीकार करने से इंकार करता है।
इस गहरी और शांत करने वाली कहानी में
भोलेनाथ हमें यह समझाते हैं कि
नियति से लड़ना हमें तोड़ता नहीं,
बल्कि हमें भीतर से थका देता है।
भगवान शोर में नहीं मिलते,
भगवान मौन में उतरते हैं।
जब मन थक कर स्वीकार करता है,
तभी सच्ची शांति जन्म लेती है।
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हर हर महादेव 🔱
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