तुर्की की मांग ठुकराई - नहीं मिलेगा गेहू और चावल । Shubhankar Mishra । Narendra Modi । Top News
Автор: FRONT
Загружено: 2026-01-17
Просмотров: 32329
तुर्की की मांग ठुकराई - नहीं मिलेगा गेहू और चावल । Shubhankar Mishra । Narendra Modi । Top News
भारत ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि राष्ट्रीय हित उसके लिए सर्वोपरि हैं। तुर्की (Turkey) की ओर से गेहूं और चावल (Wheat and Rice Export) की मांग को भारत सरकार ने ठुकरा दिया है, जिसके बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति और वैश्विक खाद्य सुरक्षा (Global Food Security) पर नई बहस शुरू हो गई है। इस बड़े फैसले के पीछे भारत की घरेलू जरूरतें, महंगाई नियंत्रण (Inflation Control), और रणनीतिक कूटनीति (Strategic Diplomacy) अहम कारण माने जा रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) के नेतृत्व में भारत सरकार ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि देश में खाद्य सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। बीते कुछ महीनों में भारत में महंगाई, मानसून की अनिश्चितता, और वैश्विक आपूर्ति संकट (Global Supply Crisis) के चलते गेहूं और चावल जैसे आवश्यक खाद्यान्नों की उपलब्धता सरकार के लिए प्राथमिक चिंता रही है। ऐसे में तुर्की की मांग को खारिज करना एक सोचा-समझा और रणनीतिक निर्णय माना जा रहा है।
तुर्की हाल के समय में आर्थिक संकट (Turkey Economic Crisis), मुद्रा अवमूल्यन और खाद्य कीमतों में तेज बढ़ोतरी से जूझ रहा है। इसी कारण उसने भारत से बड़े पैमाने पर गेहूं और चावल आयात करने की मांग रखी थी। लेकिन भारत पहले ही कई देशों के लिए अनाज निर्यात पर नियंत्रण (Grain Export Ban) लागू कर चुका है। सरकार का मानना है कि घरेलू बाजार में स्थिरता बनाए रखना और आम जनता को राहत देना ज्यादा जरूरी है।
इस फैसले का भू-राजनीतिक असर (Geopolitics) भी माना जा रहा है। हाल के वर्षों में तुर्की का रुख भारत के प्रति कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर आलोचनात्मक रहा है, खासकर कश्मीर (Kashmir Issue) जैसे संवेदनशील विषयों पर। ऐसे में भारत का यह कदम कूटनीतिक संदेश (Diplomatic Message) के तौर पर भी देखा जा रहा है कि भारत अब अपने फैसले दबाव में नहीं, बल्कि अपने हितों के आधार पर लेता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत का यह फैसला न केवल आर्थिक बल्कि राजनीतिक रूप से भी मजबूत स्थिति को दर्शाता है। आज भारत दुनिया के सबसे बड़े खाद्यान्न उत्पादक देशों में शामिल है, लेकिन इसके साथ-साथ देश की विशाल आबादी की जरूरतें भी उतनी ही बड़ी हैं। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि किसी भी वैश्विक संकट का बोझ भारतीय नागरिकों पर न पड़े।
इस वीडियो में Shubhankar Mishra विस्तार से बताएंगे कि तुर्की की मांग क्यों ठुकराई गई, इसके पीछे क्या राजनीतिक और आर्थिक कारण हैं, और इसका भारत–तुर्की संबंधों (India Turkey Relations) पर क्या असर पड़ेगा। साथ ही जानेंगे कि यह फैसला आने वाले समय में वैश्विक अनाज बाजार (Global Grain Market) और भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि को कैसे प्रभावित कर सकता है।
देश-दुनिया की ऐसी ही बड़ी और सटीक खबरों के लिए वीडियो को अंत तक देखें, चैनल को सब्सक्राइब करें और अपनी राय कमेंट में जरूर साझा करें।
Доступные форматы для скачивания:
Скачать видео mp4
-
Информация по загрузке: