Timundiya Mela
Автор: Divisha Raj vlogs
Загружено: 2023-04-22
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प्रत्येक वर्ष तिमुंडिया मेला बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने के ठीक एक या दो हफ्ते पूर्व शनिवार और मंगलवार को आयोजित होता है। जिसमें सुखद और सुगम चारधाम यात्रा की कामना की जाती है। मेले के दिन नृसिंह मंदिर में देव पूजाई समिति के कार्यालय से देव पूजाई समिति के पदाधिकारियों और पस्वाओ को ढोल दमाऊं के साथ नृसिंह मंदिर परिसर ले जाया जाता है। यहां से मां नवदुर्गा के मंदिर से मां नवदुर्गा का आवाम लाठ लाया जाता है। जिस पर मां नवदुर्गा की शक्ति रहती है, उसको नृसिंह मंदिर में लाया जाता है। यहां पर विशेष पूजा होती है। तिमुंडिया देवता का अवतार रोमांचक रहता है। तिमुंडिया का वीर रौद्र रूप धारण कर एक बकरी, 40 किलो कच्चा चावल, 10 किलो गुड़, दो घड़े पानी सबके सामने पीता है। दर्शक यह देख दंग रह जाते है।
माना जाता है तिमुंडिया तीन सिर वाला वीर था। एक सिर से दिशा का अवलोकन, एक सिर से मांस खाना और एक सिर से वेदों का अध्ययन करता था। ह्यूना गांव के जगलों में इस राक्षस ने बड़ा आतंक मचा रखा था। हर दिन मनुष्य को खाता था। एक दिन मां दुर्गा देवयात्रा पर थीं। गांव वाले मां के स्वागत के लिए नहीं आए। पूछने पर पता चला की लोग तिमुंडिया राक्षस के डर से घर से बाहर नहीं निकल रहें हैं। मां दुर्गा के कहने पर उस दिन कोई नहीं जाता है। क्रोधित तिमुंडिया गर्जना करते हुए गांव में पहुंचता है। मां नवदुर्गा और तिमुंडिया का भयंकर युद्ध होता है। मां नवदुर्गा उसके तीन में से दो सिर काट देती है। च्यों ही नवदुर्गा तीसरा सिर काटने लगती हैं तो तिमुंडिया राक्षस मां के शरणागत हो जाता है। मां उसकी वीरता से प्रसन्न होकर उसे अपना वीर बना देती है।
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