साबिर तेरी चौखट पर आकर ll चांद कादरी 2026 ll nai Qawwali Ham Sara Jamana bhul gaye ll Chand Qadri
Автор: Qawwali studio
Загружено: 2026-01-10
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बहुत खूबसूरत पंक्ति है। उसी भाव में कुछ पंक्तियाँ और जोड़ रहा हूँ:#ilovemohammad
साबिर तेरी चौखट पर आकर हम सारा ज़माना भूल गए,
तेरे नाम की मस्ती में हम अपना ही ठिकाना भूल गए।
नज़र जो उठी तेरे दर की #song तरफ़, हर ख़्वाहिश सिमट गई,#newqawwali
इश्क़ के इस सुकून में हम दर्द का फ़साना भूल गए।
तेरी रहमत की बारिश ऐसी बरसी दिल के सहरा पर,
हम ग़मों की तपन क्या होती है, ये भी बताना भूल गए।#qawwali
अगर चाहो तो इसे क़व्वाली, नातिया कलाम या ग़ज़ल की शक्ल में भी ढाल
#🌹ज़रूर—आपके लिए नई और असरदार क़व्वाली पेश है, दमदार मुखड़े और मीठे बोलों के साथ:
मुखड़ा:
साबिर तेरी चौखट पर आकर हम सारा ज़माना भूल गए,
तेरे इश्क़ की मस्ती में आकर खुद को पहचानना भूल गए।
अंतरा 1:
तेरा नाम लिया तो दिल को चैन का साज़ मिला,
टूटे हुए अरमानों को जैसे नया आग़ाज़ मिला।
जो मांगा न था वो भी तेरी रहमत से पा गए,
हम अपनी ही तक़दीर के सब शिकवे भुला गए।
मुखड़ा:
साबिर तेरी चौखट पर आकर हम सारा ज़माना भूल गए…
अंतरा 2:
ख़ाक-ए-दर ने सिखा दी हमको अदब की हर इक अदा,
झुकी जब पेशानी तो मिट गई दिल की हर इक ख़ता।
तेरे दर के फ़क़ीर बनकर सुल्तान से हो गए,
एक नज़र में हम दुनिया का हर गुरूर भूल गए।
अंतरा 3:
दूर-दूर तक गूंजे है सबरी नग़मों की तान,
इश्क़-ए-साबिर ने कर दी हर रूह पे मेहरबान।
जिसने भी दिल से पुकारा, खाली न वो लौटा कभी,
तेरे करम के क़िस्से सुनकर हम हर डर भूल गए।
मक़्ता:
हूज़ूर कहे बस इतनी दुआ, रहे दर से ये रिश्ता सदा,
साबिर के नाम की लौ में जलकर हम जीना सीख गए।
अगर चाहें तो मैं इसे तेज़ धमाल, सूफ़ियाना ठहराव, या स्टेज कव्वाली के हिसाब से और भी सजा दूँ—ताल, ताली और कोरस के साथ।
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