बाबा बिन दिल लगता ही नहीं
Автор: Virender Kumar
Загружено: 2025-12-31
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यह एक भक्ति गीत है जो बाबा खाटू श्याम के प्रति भक्त की गहरी व्याकुलता और अटूट श्रद्धा को दर्शाता है। गीत में भक्त के हृदय में बसे प्रेम, तड़प और समर्पण की भावनाएँ अत्यंत मार्मिक रूप में प्रकट होती हैं।
अटूट लगाव:
भक्त कहता है कि बाबा श्याम के बिना उसका मन कहीं और नहीं लगता। उसके सपनों, विचारों और भावनाओं में केवल बाबा ही बसे हुए हैं। वह बाबा से मार्गदर्शन की याचना करता है क्योंकि उसके हृदय में अब किसी और के लिए कोई स्थान शेष नहीं बचा है।
खाटू धाम और सेवा:
गीत में खाटू धाम को सबसे पावन और पूज्य स्थान बताया गया है। भक्त का जीवन अब केवल एक ही उद्देश्य पर केंद्रित है—बाबा श्याम की सेवा। उसके दिल की हर धड़कन में उसके सर्वेश्वर श्याम का नाम गूंजता रहता है।
हृदय की विवशता:
भक्त अपनी विवशता व्यक्त करते हुए कहता है कि अब इस दिल पर उसका कोई वश नहीं चलता। उसकी आँखों में छलकती उम्मीदें और भावनाएँ बाबा से प्रार्थना करती हैं कि वे उसे अनदेखा न करें।
तड़प और पुकार:
गीत में भक्त भावुक स्वर में कहता है कि दिल में बसकर फिर दिल को तड़पाना उचित नहीं है। बाबा श्याम के सिवा उसे संसार में कोई और अच्छा नहीं लगता।
उपमा:
जिस प्रकार पतंगा दीपक की लौ के अतिरिक्त कहीं और नहीं जाना चाहता, उसी प्रकार भक्त का मन भी बाबा खाटू श्याम की छवि और नाम के बिना कहीं और शांति नहीं पाता।
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