प्रेम का मार्ग बांका रे | Prem Ka Maarg Baanka Re | संत कबीर साहेब के शब्द (
Автор: Puran Dass
Загружено: 2026-01-18
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संत शिरोमणि कबीर साहेब जी !
सतगुरु ईन्द्रमणी साहेब जी !
सत साहेब, सतनाम , सत श्री अकाल !
#shabad
टेक - प्रेम का मार्ग बांका रे ,
जिसने दिया शीश प्रेम में अर्पण वाका रे ।
1 . यह तो घर है प्रेम का रे , खाला का घर ना ।
शिश काट चरणा धरे रे , तब बैठ घर माह ,
देख कायर मन का सांका रे । ।
2 . प्रेम प्याला जो पीवे रे ,शीश दक्षिणा दे ।
लोभी शीश ना दे सके , नाम प्रेम का ले ,
नहीं वह प्रेम वाका रे । ।
3 . प्रेम ना बाड़ी उपजै रे , प्रेम ना हाट बिकाय ।
राजा प्रजा जे चाहे , शीश देय ले जाए ,
मिले ना मुक्ति का नाका रे । ।
4 . जोगी जंगल सेवाड़ा रे ' सन्यासी दुरवेश ।
प्रेम बिना पहुंचे नहीं रे ,दुर्लभ गुरु का देश ,
लेष जौही वर्णन थाका रे । ।
5. प्रेम पियाला नाम का रे ,चाखत अधिक रसाल ।
कबीर पाना कठीन है रे , मांगे शिश कलाल ,
क्या वो तेरा बाबा काका रे ।।
सत साहेब *
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