एक शाम शंकर के नाम –भगवान की भाषा क्या है? An Evening for Lord Shankar, What is the Language of God?
Автор: Namami Shamishan Nirvan Roopam
Загружено: 2025-07-09
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जय माता दी, हर हर महादेव!
संत बलजीत सिंह जी कांवड़ शिवरात्रि के शुभ अवसर पर कांवड़ियों और संगत को संबोधित करते हुए कहते हैं:
"सांसारिक जीवन की दुविधाएं और कठिनाइयां तो चलती ही रहेंगी, परंतु ऐसे जीवन से मुक्ति कैसे मिले?"
संतों-महात्माओं की शिक्षा यही है कि भक्ति के बिना मुक्ति नहीं।
उन्होंने कांवड़ियों की श्रद्धा और भक्ति-भाव की प्रशंसा करते हुए कहा कि सावन का महीना विशेष रूप से शिव भक्ति के लिए समर्पित है। सावन महीने में शिव पुराण का पाठ करना चाहिए।
पुरुषों के लिए कांवड़ यात्रा शिव भक्ति का एक माध्यम है, वहीं महिलाओं के लिए मंगलवार को मंगला गौरी पूजा का विधान है।
गंगा जल लाना और शिव पर चढ़ाना — सावन में पूरा समय शिव को ही समर्पित होना चाहिए, क्योंकि शिव ही हमारे पिता हैं, शिव ही हमारी माता हैं।
शिव ही रूप बदलते हैं, वही विभिन्न रूपों में प्रकट होते हैं।
मनुष्य शिव का अंश है — और अंश तथा अंशी में कोई भेद नहीं होता।
हम सभी प्राणी भी शिव ही हैं। शिव ही नर हैं, शिव ही नारी हैं।
शक्ति एक ही है — वही महाकाल हैं, वही काल हैं, वही त्रिकाल हैं।
महत्व हमारे भाव का है। हम किस रूप में उनको पूजते हैं, वह महत्वपूर्ण नहीं है — महत्वपूर्ण है हमारा भाव।
विभिन्न रूपों को पूजने की वजह से ही आज दुनिया में लड़ाई हो रही है। हर कोई अपनी ‘दुकान’ को बेहतर बता रहा है।
ग़ज़ब की बात यह है कि हर स्थान और हर पूजा स्थल पर शिव ही उपस्थित हैं।
कार्य के अनुसार उनके रूप हैं, परंतु नाम बदलने से उनका गुण नहीं बदलता।
शिव तो शिव ही हैं।
हम उन्हें अल्लाह कहें, वाहेगुरु कहें, चाहे किसी भी नाम से पुकारें —
वह शिव तो शिव ही रहेंगे।
हमारा भाव मायने रखता है, नाम नहीं।
शिव हमारी भाषा नहीं समझते — वह न हिंदी, न गुरमुखी, न उर्दू, न फारसी समझते हैं।
अगर वह कुछ समझते हैं, तो वह है — हमारा भाव, हमारा अपार प्रेम।
गुरु नानक साहेब जी ने भी कहा है:
साचा साहिबु साचु नाइ, भाखिआ भाउ अपारु॥
वह भगवान हमारी सुनेगा, लेकिन उसकी भाषा क्या है? — वह है अपार प्रेम।
यदि अपार श्रद्धा और प्रेम भगवान से होगा, तो वह हमारी सुनेगा।
हमें अपने और अपनों से भी अधिक भाव भगवान को देना होगा — तभी वह हमारी सुनेगा।
वह तुम्हारे हृदय में ही है।
तुम्हारे भीतर भी और बाहर भी।
वह तुम्हें सुन रहा है, तुम्हारी आवश्यकताओं को देख रहा है।
उस पर विश्वास रखिए, श्रद्धा रखिए, और अपने भाव को भगवान के प्रति और अधिक गहरा बनाइए
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