1909 का अधिनियम (मार्ले-मिंटो सुधार): भारत में "सांप्रदायिकता" और "विभाजन" की शुरुआत | Morley-Minto
Автор: #Achiever's hub
Загружено: 2026-01-06
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इस वीडियो में हम 1909 के भारत परिषद अधिनियम (Indian Councils Act of 1909), जिसे मार्ले-मिंटो सुधार (Morley-Minto Reforms) भी कहा जाता है, का गहराई से विश्लेषण करेंगे। यह एक्ट भारत में सांप्रदायिक राजनीति की शुरुआत का कारण बना।
🔥 वीडियो के मुख्य बिंदु (Key Highlights):
सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व (Separate Electorate): पहली बार मुसलमानों के लिए पृथक निर्वाचक मंडल की व्यवस्था की गई। इसने "फूट डालो और राज करो" की नीति को बढ़ावा दिया। लॉर्ड मिंटो को "सांप्रदायिक निर्वाचक मंडल का जनक" कहा गया।
परिषदों का विस्तार: केंद्रीय और प्रांतीय विधान परिषदों में सदस्यों की संख्या काफी बढ़ाई गई (केंद्रीय में 16 से 60)।
वायसराय की कार्यपालिका में पहला भारतीय: सत्येंद्र प्रसन्न सिन्हा (S.P. Sinha) को वायसराय की कार्यकारी परिषद (Executive Council) का पहला भारतीय सदस्य (विधि सदस्य) नियुक्त किया गया।
शक्तियों में वृद्धि: सदस्यों को बजट पर संकल्प रखने और पूरक प्रश्न पूछने का अधिकार मिला।
यह वीडियो इन सभी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण है: UPSC CSE (Pre & Mains), State PSC (UPPSC, BPSC, MPPSC, RAS), SSC CGL/CHSL, Railway NTPC/Group D, UP Police (SI/Constable), & UGC NET History.
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