🛕💐🌺एक वैष्णव भक्ति को अपने भक्ति तभी सार्थक माननीचाहिए जब उसके साथ यह लीलाएंघटित हो जाए 🌺🛕💐
Автор: Shree Nath katha
Загружено: 2026-01-07
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डिस्क्रिप्शन:
अपनी भक्ति को तब ही सच्चा और सार्थक मानना चाहिए, जब उस भक्ति के साथ हमारे जीवन में ठाकुर जी की मधुर लीलाएँ दिखाई देने लगें।
केवल नाम जप या बाहरी दिखावा ही भक्ति नहीं है, बल्कि जब हृदय बदलने लगे, अहंकार मिटने लगे, और हर परिस्थिति में ठाकुर जी की कृपा का अनुभव हो — वही सच्ची भक्ति है।
जिस भक्त के जीवन में ठाकुर जी स्वयं मार्गदर्शन करने लगें, सुख-दुःख को समान बना दें, और हर कदम पर अपनी लीलाओं से विश्वास बढ़ाएँ, समझ लेना चाहिए कि उसकी भक्ति स्वीकार हो चुकी है।
ऐसी भक्ति में कोई दिखावा नहीं, केवल समर्पण होता है… और समर्पण में ही लीलाएँ प्रकट होती हैं। 🌸
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