मारीच, प्रभु राम, लक्ष्मण जी और गुरु वशिष्ठ ।
Автор: PAHADI FROM PAHAD
Загружено: 2026-01-06
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मारीच प्रभु राम, लक्ष्मण जी और गुरु वशिष्ठ ।
मारीच और प्रभु (श्रीराम) की कहानी रामायण का एक महत्वपूर्ण प्रसंग है, जिसमें मारीच, ताड़का का पुत्र, पहले राम के बाण से बचकर 100 योजन दूर फेंका जाता है और बाद में रावण के कहने पर स्वर्ण मृग का रूप धारण कर सीता का हरण कराने में मदद करता है, जहाँ राम के हाथों मारे जाने पर वह परम गति प्राप्त करता है, यह कहानी दुष्टता और प्रभु की कृपा के संगम को दर्शाती है।
जन्म और दुष्टता: मारीच राक्षस सुंद और ताड़का का पुत्र था। अगस्त्य मुनि के श्राप के कारण वह राक्षस बना और विश्वामित्र के यज्ञ में बाधाएँ डालने लगा।
राम से सामना: जब श्रीराम ने विश्वामित्र के साथ वन में यज्ञ की रक्षा की, तब उन्होंने मारीच और उसके भाई सुबाहु को दंडित किया। श्रीराम के एक ही बाण से मारीच 100 योजन दूर फेंका गया और वह तपस्या करने लगा।
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