Ambernath Shiv Temple | अंम्ब्रेश्र्वर प्राचीन शिव मंदिर | अंबरनाथ महादेव | Ambreshwar Shiv Mandir
Автор: Explore With Bala
Загружено: 2022-05-19
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Ambreshwar shiv temple in Ambernath Maharashtra
11वीं शताब्दी में बना है महादेव की यह अंबरनाथ शिव मंदिर
महाराष्ट्र में मुंबई के पास अंबरनाथ शहर में अंबरनाथ मंदिर स्थित है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और इसे अंबरेश्वर के नाम से भी जाना जाता है। मंदिर में मिले शिलालेख के अनुसार, इस मंदिर का निर्माण 1060 ईं में राजा मांबाणि ने करवाया था। इस मंदिर को पांडवकालीन मंदिर भी बताया जाता है। मंदिर के बारे में कहा जाता है कि इस मंदिर जैसा पूरे विश्व में कोई मंदिर नहीं है। अंबरनाथ शिव मंदिर के पास कई ऐसे नैसर्गिक चमत्कार हैं, जिससे इसकी मान्यता बढ़ती जाती है। आइए जानते हैं इस मंदिर के बारे में खास बातें…
ऐसा है यहां का शिवलिंग
अंबरनाथ शिव मंदिर अद्वितीय स्थापत्य कला के लिए प्रसिद्ध है। 11वीं शताब्दी में बने इस मंदिर के बाहर दो नंदी बैल बने हुए हैं। मंदिर के प्रवेश के लिए तीन मुखमंडप हैं। अंदर जाते हुए सभामंडप तक पहुंचते हैं और फिर सभामंडप के बाद 9 सीढ़ियों के नीचे गर्भगृह स्थित है। मंदिर की मुख्य शिवलिंग त्रैमस्ति की है और इनके घुटने पर एक नारी है, जो शिव-पार्वती के रूप को दर्शाती है। शीर्ष भाग पर शिव नृत्य मुद्रा में दिखाई देते हैं।
पेडों के बीच में स्थित है यह मंदिर
मंदिर के गर्भगृह के पास गर्म पानी का कुंड भी है। इसके पास ही एक गुफा भी है, जो बताया जाता है कि उसका रास्ता पंचवटी तक जाता है। यूनेस्को ने अंबरनाथ शिव मंदिर सांस्कृतिक विरासत घोषित किया है। वलधान नदी के तट पर स्थित यह मंदिर आम और इमली के पेड़ से घिरा हुआ है।
आकर्षित करती हैं यहां की मूर्तियां
मंदिर की वास्तुकला देखते ही बनती है, जिससे यहां देश-विदेश से कई लोग आते हैं। मंदिर की बाहर की दिवारों पर भगवान शिव के अनेक रूप बने हुए हैं। इसके साथ ही गणेश, कार्तिकेय, चंडिका आदि देवी-देवताओं की मूर्तियां से सजा हुआ है। साथ ही देवी दुर्गा की असुरों का नाश करते हुए भी दिखाया गया है।
हर साल मेले का होता है आयोजन
मंदिर के अंदर और बाहर कम से कम ब्रह्मदेव की 8 मुर्तियां बनी हुई हैं। साथ ही इस जगह के आसपास कई जगह प्राचीन काल की ब्रह्मदेव की मुर्तियां हैं, जिससे पता चलता है कि यहां पहले ब्रह्मदेव की उपासना होती थी। शिवरात्रि के अवसर पर यहां मेले का आयोजन किया जाता है। यह मेला 3-4 दिनों तक लगाया जाता है, तब यहां काफी भीड़ देखी जा सकती है।
एक ही रात में बनाया था यह विशाल मंदिर
बताया जाता है कि अज्ञातवास के दौरान पांडव कुछ वर्ष अंबरनाथ में बिताए थे, तब उन्होंने विशाल पत्थरों से एक ही रात में इस मंदिर का निर्माण किया था। फिर कौरवों द्वारा लगातार पीछे किए जाने के भय से यह स्थान छोड़कर चले गए। जिससे मंदिर का कार्य पूरा नहीं हो सका। सालों से मौसम की मार झेल रहा यह मंदिर आज भी खड़ा है।
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