Ab bhi ghazal
Автор: Guldasta-e-Nazm
Загружено: 2025-12-17
Просмотров: 109
Ab bhi ghazal
तेरे इश्क़ का मुझपे रुआब है, अब भी
ज़िंदा एक खोया ख़्वाब है, अब भी
तेरे इश्क़ का मुझपे रुआब है, अब भी
रातें सूनी, चाँद भी मेरा नहीं है
सीने में खलिश वो आग है अब भी
तेरे इश्क़ का मुझपे रुआब है, अब भी
महफ़िल में हँसना अब बस एक फ़साना है
आँखों का नम, मिज़ाज़ है अब भी
तेरे इश्क़ का मुझपे रुआब है, अब भी
रास्तों की ठंडी हवा भी तन्हा लगती है
तन्हाई में दर्द की, आवाज़ है अब भी
तेरे इश्क़ का मुझपे रुआब है, अब भी
तेरे बिना हर दिन अधूरा सा लगता है
जाने क्यों इतना तू, खास है अब भी
तेरे इश्क़ का मुझपे रुआब है, अब भी
दिल की खामोशी भी अब कुछ कहती है
वो तड़प, नासाज़ है अब भी
तेरे इश्क़ का मुझपे रुआब है, अब भी
कहाँ जाऊँ, कौन समझे मेरी तन्हाई
शाम से इस हाथ में, शराब है अब भी
तेरे इश्क़ का मुझपे रुआब है, अब भी
तेरे इश्क़ का मुझपे रुआब है, अब भी
ज़िंदा एक खोया ख़्वाब है, अब भी
तेरे इश्क़ का मुझपे रुआब है, अब भी
Доступные форматы для скачивания:
Скачать видео mp4
-
Информация по загрузке: