भगवान बृहस्पतिवार की कथाभगवान गुरु बृहस्पति की कथाभगवान विष्णु की कथापूजा विधि और नियम
Автор: Vastu chamtkari Mantra
Загружено: 2025-08-15
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भगवान बृहस्पतिवार की कथा
भगवान गुरु बृहस्पति की कथा
भगवान विष्णु की कथा
पूजा विधि और नियम
🙏 बृहस्पतिवार व्रत कथा | गुरु बृहस्पति की महिमा | भगवान विष्णु की कथा | पूजा विधि और नियम 🙏
बृहस्पतिवार (Brihaspativar) व्रत हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र और फलदायी माना गया है। यह व्रत देवताओं के गुरु भगवान बृहस्पति (Lord Brihaspati / Guru Dev) और भगवान विष्णु (Lord Vishnu) को समर्पित है। इस व्रत को करने से धन-समृद्धि, सुख-शांति, संतान सुख और वैवाहिक जीवन में मधुरता आती है।
📖 कथा (Brihaspativar Vrat Katha in Hindi)
एक समय की बात है, एक नगर में एक धर्मनिष्ठ ब्राह्मण अपने परिवार सहित रहता था। धन की कमी के कारण वह हमेशा चिंतित रहता, परंतु उसकी पत्नी श्रद्धालु और भक्ति में लीन रहती थी। एक दिन उसने पड़ोस में एक स्त्री को पीले वस्त्र पहनकर केले के वृक्ष की पूजा करते देखा। पूछने पर उसने बताया कि यह बृहस्पतिवार का व्रत है, जो घर में सुख-समृद्धि लाता है और दरिद्रता दूर करता है।
ब्राह्मणी ने यह व्रत करना शुरू किया। वह प्रातः स्नान कर पीले वस्त्र धारण करती, केले के वृक्ष की पूजा करती, पीले फूल और फल चढ़ाती, बेसन के लड्डू का भोग लगाती और कथा सुनती। शीघ्र ही उनके घर की दरिद्रता दूर हो गई और बृहस्पति देव की कृपा से सुख-शांति लौट आई।
📖 भगवान गुरु बृहस्पति की कथा (Lord Brihaspati Story)
गुरु बृहस्पति देवताओं के गुरु हैं, जिन्हें विद्या, धर्म, ज्ञान, सत्य और न्याय का प्रतीक माना जाता है। पुराणों में वर्णन है कि जो व्यक्ति बृहस्पति देव की उपासना करता है, उसके जीवन से अज्ञान और अशुभ ग्रहों का प्रभाव समाप्त हो जाता है।
📖 भगवान विष्णु की कथा (Lord Vishnu Story)
बृहस्पतिवार के दिन भगवान विष्णु की पूजा भी विशेष रूप से की जाती है, क्योंकि वे सृष्टि के पालनकर्ता और धर्म के रक्षक हैं। मान्यता है कि बृहस्पतिवार को विष्णु भगवान के पीले वस्त्र पहनकर और पीले चावल का भोग लगाकर पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
🪔 पूजा विधि और नियम (Pooja Vidhi & Niyam)
प्रातः जल्दी उठकर स्नान करें और पीले वस्त्र धारण करें।
पीले रंग के फूल, चना दाल, गुड़, बेसन के लड्डू, और पीले फल पूजन में चढ़ाएं।
केले के वृक्ष या विष्णु मंदिर में दीपक जलाएं।
बृहस्पति देव और विष्णु भगवान की मूर्ति या चित्र पर हल्दी का तिलक करें।
“ॐ बृं बृहस्पतये नमः” मंत्र का 108 बार जप करें।
कथा सुनें और आरती करें।
व्रत के दिन नमक का सेवन न करें और केवल पीले भोजन का सेवन करें।
🌼 Benefits (फल)
धन और समृद्धि में वृद्धि
संतान सुख की प्राप्ति
वैवाहिक जीवन में सामंजस्य
रोग और संकटों से मुक्ति
गुरु ग्रह के अशुभ प्रभाव का निवारण
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