6/24 | भारत: प्रकृति पूजकों का देश | Indian_Civilization | Bharat: Land of Nature Worshippers
Автор: Vishuddhi Films
Загружено: 2021-04-23
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भारत प्रकृतिपूजकों का देश है। जानें प्राचीन भारतीयों और हिन्दुओं ने कैसे प्रकृति को पूजा। भारत को प्रकृति ने तीन ऐसे उपहार दिए हैं जो दूसरे भूखंडो के पास नहीं हैं ।
जाने क्यों आदियोगी और कैलाश के बिना भारत की कल्पना भी नहीं हो सकती।
जाने क्यों पश्चिम ने महाकवि कालिदास के काव्य अभिज्ञान शाकुंतलम की नायिका, शकुंतला को "प्रकृति का बालक" कहा। लेकिन शकुंतला के बालक, भारत का वे शोषण करते रहे।
देखें रेगिस्तान एवं अरण्य की सभ्यता में अंतर, श्री राजीव मल्होत्रा द्वारा।
प्राचीन भारतीयों का आध्यात्मिक पर्यटन क्या कहलाता था।
अगला अध्याय ---
अध्याय ७, भारत, सिन्धुघाटी सभ्यता व वैदिक संस्कृति/ Indus Valley Civilization in Present Indian Life
• वैदिक, सिन्धुघाटी सभ्यता | Indian_Civiliza...
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संक्षिप्त विवरण ---
वृत्तचित्रों की शृंखला : भारतीय सभ्यता : सातत्य और परिवर्तन
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इस वृत्तचित्र का उदेश्य भारत के ज्ञान - विज्ञान, कलाओं और जीवन के वैज्ञानिक व आध्यात्मिक महत्व को प्रामाणिक रूप से प्रस्तुत करना है। महारास की भारतीय संस्कृति की यह भव्य प्रस्तुति केवल मंत्रमुग्ध नहीं करती । भविष्य के लिए नई दृष्टि देती है। भारतीयों की प्रकृति श्रद्धा, मानव और पृथ्वी दोनों को उपभोक्तावाद से बचा सकती है। प्रकृति की विविधता और उसकी आन्तरिक एकता, मानव की भी वास्तविकता है। विविधता का उत्सव मनाती महारास की भारतीय संस्कृति हज़ारों वषों तक जीवन को सत्य,समृद्धि और सौन्दर्य से तृप्त करती रही है। यह फिल्म श्रृंखला इसे भारतीय दर्शन, प्राचीन स्थापत्य व लोक कलाओं से दर्शाती है।
पश्चिम के आक्रमणकारी भारत की देव विविधता और कलाओं के प्रति घृणा से भरे हुए थे। उनके आक्रमण युद्घ नहीं थे क्रूर हत्याकांड थे। उन्होंने विश्वविद्यालयों को जलाकर भारत के ज्ञान - विज्ञान की निरन्तरता को अवरुद्ध कर दिया।
भारत का मध्यकालीन विनाश और उपनिवेशिक शोषण मानवता की बहुत बड़ी हानि है। भारतीयों के स्वस्थ जीवन का आधार उनकी समग्र दृष्टी रही है।
अखण्ड दृष्टि का पुननिर्माण कठिन है। लेकिन अपनी सभ्यता के पुननिर्माण की अदम्य इच्छा भारतीयों के मन में आज भी है। भारतीय आज भी प्राचीन सभ्यता के उच्च स्वरुप को बनाए रखना चाहते हैं। इस फिल्म का निर्माण उसी इच्छा का परिणाम है।
विशेष :
१० वर्षों का अनुसंधान और फिल्मांकन
१४१ भारतीय स्थल, संग्रहालय और पुस्तकालय
५२ विदेशी स्थल और संग्रहालय
३० उच्चकोटि के विद्वानों का योगदान - इतिहास, दर्शन, पुरातत्व, संस्कृत, कला, मस्तिष्क विज्ञान , योग आदि क्षेत्र से।
भारत की अदभुत मूर्तिकला, नृत्य, संगीत, चित्रकला, मंदिर स्थापत्य ज्ञान और आनन्द को पैदा करने वाला है यह वृत्तचित्र।
प्रस्तुतकर्ता : श्रीमती सूरज एवं श्री वल्लभ भंशाली
शोध और निर्देशन : डॉ दीपिका कोठारी एवं रामजी ओम
विद्वान : प्रो मिनाक्षी जैन, डा. कोनराड एल्स्ट, प्रो. मक्खन लाल
निर्माता : विशुद्धि फिल्म्स एवं देश अपनाएं सहयोग फाउंडेशन
लेखन एवं फिल्मांकन: रामजी ओम
संकलन : संतोष राउत
पार्श्व संगीत : टूटन बी रॉय
website : www.vishuddhifilms.com
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