ज़मीन का बंटवारा हो चुका है, फिर भी भाई हिस्सा मांग रहा है? क्या होगा | बंटवारा |
Автор: Kanuni Salahkar by Adv Karan Singh
Загружено: 2025-11-13
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पारिवारिक संपत्ति के मौखिक बंटवारे की कानूनी स्थिति और उससे जुड़े विवादों का गहन विश्लेषण प्रस्तुत करते हैं। स्रोतों का मुख्य निष्कर्ष यह है कि यदि मौखिक बंटवारे पर सहमति बन चुकी हो और सभी पक्षों ने लंबे समय तक उस पर अमल किया हो (जैसे कि अपने हिस्से में निर्माण या सुधार करके), तो वह बंटवारा कानूनी रूप से वैध माना जाता है और उसे आसानी से चुनौती नहीं दी जा सकती। हालांकि, ऐसे स्थापित बंटवारे को केवल तीन विशिष्ट आधारों पर ही रद्द किया जा सकता है: धोखाधड़ी, तथ्यों का छिपाना, या किसी वैध सह-स्वामी को बाहर रखना। स्रोतों में यह भी बताया गया है कि विवादों से बचने के लिए बंटवारे को लिखित रूप में दर्ज और पंजीकृत कराना तथा राजस्व रिकॉर्ड में दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) कराना आवश्यक है, तथा कई सर्वोच्च न्यायालय के न्यायिक नज़ीरों का हवाला दिया गया है जो इस सिद्धांत की पुष्टि करते हैं कि अमल में लाए जा चुके बंटवारे को एक लंबी सीमा अवधि (Limitation Period) के बाद चुनौती नहीं दी जा सकती।
बंटवारा हो चुका था फिर भी भाई ने केस कर दिया
क्या पुराना बंटवारा दोबारा चुनौती दी जा सकती है
जमीन का बंटवारा और हक
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