मानस-प्रबोध | मनाचे श्लोक क्रमांक - ३४ | निरुपणकार - श्री. विनीत जोशी
Автор: Shree Chaitanya Ram
Загружено: 2025-11-23
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उपेक्षा कदा रामरुपी असेना।
जिवां मानवां निश्चयो तो वसेना॥
शिरी भार वाहेन बोले पुराणीं।
नुपेक्षी कदा राम दासाभिमानी॥३४॥
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