क्यों उचित नहीं है अहं ब्रह्मास्मि कहना, इससे श्रेष्ठ क्या है... क्या बोले भगवान
Автор: Adbhut gyan Gatha
Загружено: 2023-11-04
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नमस्कार दोस्तो, चिदाकाश गीता की इस व्याख्या में आपका स्वागत है। आज हम श्लोक संख्या 64 पर चर्चा करेंगे। लेकिन चर्चा करने से पहले एक निवदेन है। शुरू की कड़ियों में हमने इसका पालन किया लेकिन अब जब नए साथी जुड़ रहे हैं, हमें लगता है कि फिर से हमें निवेदन करना चाहिए कि चिदाकाश की व्याख्या करने का यह अर्थ नहीं है कि यह अंतिम व्याख्या है, या यही एकमात्र सही व्याख्या है। क्योंकि एक तो हमें ऐसा कोई अधिकार नहीं है कि इसे अंतिम बता सकें, दूसरी बात न इतने ज्ञानी हैं कि हम दावा करें कि यही चिदाकाश गीता का अर्थ है। हम अपनी मति, बुद्धि, संसार और आत्मिक जगत में अपनी स्थिति के अनुरूप ही इसकी व्याख्या करने का प्रयास करते हें।
हम यह भी नहीं कहते कि भविष्य में हम अगर इसी श्लोक की फिर से व्याख्या करेंगे तो संभव है कि वह इस व्याख्या से अलग हो क्योंकि तब तक की यात्रा में हमने बहुत कुछ सीखा होगा। तो शास्त्रों की व्याख्या और उन्हें समझना एक जीवंत क्रिया है। आपकी यात्रा हमसे बहुत अलग हो सकती है, इसलिए अगर आपको हमारी व्याख्या समझ नहीं आए या सही न लगे तो नाराज होने की जरूरत नहीं है। हमें आप कमेंट में सुझाव दे सकते हैं अपनी व्याख्या के साथ, बहुत से साथियों ने ऐसा किया भी है। हम आगे जब भी दोबारा व्याख्या करेंगे तो उसे शामिल करने का प्रयास करेंगे। धन्यवाद
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