बिजली
Автор: DIVINETALKS
Загружено: 2026-01-14
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हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में स्थित बिजली महादेव मंदिर भारत के सबसे रहस्यमय और प्राचीन मंदिरों में से एक है। यह मंदिर समुद्र तल से लगभग 2,460 मीटर की ऊँचाई पर व्यास और पार्वती नदियों के संगम के ऊपर एक सुंदर पहाड़ी पर स्थित है।
यहाँ का इतिहास और मान्यताएँ जितनी रोचक हैं, उतनी ही चमत्कारी भी।
1. पौराणिक कथा: कुलान्त दैत्य का अंत
बिजली महादेव का इतिहास कुलान्त नामक एक दैत्य से जुड़ा है। पौराणिक कथाओं के अनुसार:
• दैत्य का षड्यंत्र: कुलान्त नामक राक्षस कुल्लू की घाटी को पानी में डुबोना चाहता था। उसने इसके लिए व्यास नदी के प्रवाह को रोकने की कोशिश की।
• भगवान शिव का प्रहार: भगवान शिव ने उस राक्षस के इरादे को भांप लिया और उससे युद्ध किया। शिव ने चालाकी से दैत्य के कान में कहा कि "तुम्हारी पूंछ में आग लगी है।" जैसे ही कुलान्त पीछे मुड़ा, शिव ने अपने त्रिशूल से उसका वध कर दिया।
• कुल्लू नाम की उत्पत्ति: माना जाता है कि उस दैत्य का विशाल शरीर एक पर्वत में बदल गया, जिससे इस पूरी घाटी का नाम 'कुलान्तपीठ' (दैत्य का अंत होने का स्थान) पड़ा, जो समय के साथ बदलकर 'कुल्लू' हो गया।
2. हर 12 साल में गिरती है 'बिजली'
इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता इसका नाम "बिजली महादेव" होने का कारण है।
• शिवलिंग पर प्रहार: यहाँ के मुख्य शिवलिंग पर हर 12 साल (कुछ मान्यताओं के अनुसार कुछ वर्षों के अंतराल पर) में आसमानी बिजली गिरती है।
• शिवलिंग का टूटना: बिजली गिरने से शिवलिंग खंडित होकर बिखर जाता है।
• मक्खन से जुड़ना: इसके बाद मंदिर के पुजारी बिखरे हुए शिवलिंग के टुकड़ों को इकट्ठा करते हैं और उसे मक्खन (सत्तू) के साथ जोड़ते हैं। कुछ समय बाद, वह शिवलिंग फिर से अपने पुराने ठोस आकार में आ जाता है।
3. शिव ने स्वयं क्यों लिया यह कष्ट?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव नहीं चाहते थे कि जब बिजली गिरे तो उससे जन-धन की हानि हो। सृष्टि की रक्षा के लिए उन्होंने इंद्र देव को आदेश दिया था कि वह बिजली हर बार उनके ऊपर (शिवलिंग पर) गिराएं। शिव इस बिजली को अपने ऊपर सहकर पूरे ब्रह्मांड और कुल्लू घाटी के लोगों की रक्षा करते हैं।
4. मंदिर की बनावट और वातावरण
• शैली: यह मंदिर पारंपरिक पहाड़ी काष्ठकला (Kash-style) से बना है।
• ध्वज स्तंभ: मंदिर के बाहर एक बहुत ऊँचा लकड़ी का खंभा (ध्वज) लगा है, जो आसमानी बिजली को आकर्षित करने में मदद करता है।
• दृश्य: यहाँ से कुल्लू और मणिकरण घाटी का 360-डिग्री विहंगम दृश्य दिखाई देता है।
यात्रा के लिए सुझाव
बिजली महादेव की यात्रा के लिए कुल्लू से लगभग 20-22 किमी की दूरी तय करनी पड़ती है, जिसमें चन्सारी गांव से लगभग 3-4 किमी की पैदल चढ़ाई शामिल है।
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