तू बाहर क्या ढूंढता है सब कुछ तेरे अंदर है/
Автор: ZEN@INFO.
Загружено: 2025-12-27
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lyrics by Sonu Kumar
song singer suno AI pro.
हरि ओम... तत् सत्... सुन... तू बाहर क्या ढूँढता है? सब कुछ तेरे अंदर है। तू बस एक बूँद नहीं... तू पूरा समंदर है।
ना मंदिर में, ना मस्जिद में, वो तेरे ही पास है, हर धड़कन में ज़िंदा, वो अनकहा एहसास है। अहं को तू छोड़ दे, फिर देख क्या नज़ारा है, तू अकेला नहीं बंदे, सारा ब्रह्मांड तुम्हारा है।
महल बनाए मिट्टी के, और मिट्टी में ही जाना है, मुसाफिर है तू जग में, ये क्या तेरा ठिकाना है? मोह-माया की ज़ंजीरें, तूने खुद ही तो बांधी हैं, बाहर दिखता सन्नाटा, पर अंदर उठी आँधी है।
तू भागा फिरे पीछे, उन चीज़ों के जो फ़ानी हैं, किरदार बदलता रहता,
पर पुरानी वही कहानी है।
कभी आँख मूँद के देख ज़रा, कौन चलाता साँसों को, कौन दे रहा रोशनी, तेरी इन प्यासी आँखों को?
अहम-ब्रह्मास्मि! बोल सच, क्या तू पहचानता है? दूसरों की छोड़, क्या तू खुद को भी जानता है? क्रोध, लोभ और ईर्ष्या, ये तेरे असली दुश्मन हैं, इनको जो जीत ले, वही असली भगवन है।
कर्म की ये खेती है, जो बोयेगा वो पाएगा, खाली हाथ आया था, और खाली हाथ जाएगा। पर रूह पे जो दाग़ लगे, वो कैसे धो पाएगा? जाग जा मुसाफिर, अब कितना और सोएगा?
मौन में संगीत है... शोर में तो ज़ंग है, सत्य की तू राह पकड़, तू महादेव के संग है। तू ही शिव है, तू ही शक्ति, तू ही प्रेम का रंग है।
ना मंदिर में, ना मस्जिद में, वो तेरे ही पास है, हर धड़कन में ज़िंदा, वो अनकहा एहसास है...
शांति... शांति... शांति... अपने अंदर झाँक... दिखावा छोड़, रूह से नाता जोड़।
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