जब शिव उतर आया धरती पर../
Автор: ZEN@INFO.
Загружено: 2025-12-23
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जब शिव उतर आया धरती पर... हो ...🌼
मुखड़ा (कहानी की तरह आरंभ)
जब दुनिया थक कर रो पड़ी, हर ओर अँधेरा छाया था।
तब मौन तोड़ कर शिव ने, ज्ञान का दीप जलाया था॥
न रूप था, न रंग था, न सिंहासन, न सोने का कोई ताज। बिंदु-स्वरूप वो आया धरती पर, बन बच्चों का सिरमौर आज॥
अंतरा 1 (कहानी आगे बढ़ती है)
किसी महल में नहीं उतरा, न मंदिर, न कोई दरबार।
एक साधारण तन में आकर, बोला – “मैं हूँ तेरा आधार।”
कहा – “तू आत्मा है अविनाशी, न यह तन है, न यह नाम।”
सुनते ही काँप उठा मन, जैसे मिल गया खोया हुआ धाम॥
अंतरा 2 (भाव गहरा होता है)
जिसे दुनिया ने ठुकराया था, जिसे अपनों ने भी छोड़ दिया।
उसी को गले लगाया शिव ने, राजाई का हक़ दे दिया॥
न पूछा जाति, न पूछा धन, न पापों का कोई हिसाब।
बस एक नज़र में भर दिया, शांति, शक्ति और हर जवाब॥
अंतरा 3 (गीत का उभार)
बोला – “बच्चे, याद में रहना, यही है सच्चा योग।
मैं ही हूँ शांति का सागर, मिटा दूँ हर इक रोग।”
पुरानी दुनिया मिटेगी अब, नया सवेरा आएगा।
जो शिव की याद में खो जाए, वो ही देवता कहलाएगा॥
अंतिम मुखड़ा / कोरस (गाने का हुक लाइन)
शिव आया… शिव आया… ज्ञान का दीप जलाया।
रोती दुनिया हँस पड़ी, जब बाबा शिव आया॥
शिव आया… शिव आया… राजयोग सिखलाया।
आत्मा को भगवान से, फिर से मिलवाया॥
लिरिक्स बाय सोनू कुमार
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