MARE KARVU CHE UPDHAN | PARTH DOSHI | PURNA MUKTI SADHANA PARV - SHANKHESHWAR
Автор: DHARM DHOON
Загружено: 2025-10-14
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करवूं छे उपधान” — यह केवल एक गीत नहीं, यह उपधान तप की आत्मिक साधना का संगीत है।
यह भक्ति, त्याग और आत्मसंयम की उस यात्रा का अनुभव कराता है जहाँ प्रत्येक सुर में श्रद्धा की गहराई और प्रत्येक शब्द में तप की महिमा गूँजती है।
यह गीत प्रस्तुत है प्रवचन श्रुत तीर्थ, शंखेश्वर में आरंभ हुए उपधान तप के पावन अवसर पर,
जो हो रहा है प.पू.आ.भ श्रीमद् विजय पूर्णचंद्र सूरीश्वरजी महाराजा एवं प.पू.आ.भ श्रीमद् विजय मुक्तिप्रभ सूरीश्वरजी महाराजा तथा अन्य 125+ साधु-साध्वी भगवंतों के निश्रा में।
यह गीत समर्पित है उन सभी तपस्वियों को —
जो त्याग में सुख और तप में आनंद का अनुभव कर रहे हैं।
SONG - MARE KARVU CHE UPDHAN
LYRICS - P.P ACHARYA SHRI MOKSHRATI SURIJI M.S
VOICE - PARTH DOSHI
MUSIC - RAJU DAS
MIXING AND MASTERING - SURAJ NAG
SUNSHINE STUDIO- MUMBAI
COURTESY - मातुश्री मूलीबाई हस्तीमलजी सांखला परिवार
PRESENTED BY : DHARM DHOON
Lyrics
तर्ज: हाल काना ! मने द्वारिका देखाड
रंग लाग्यो, ए लाग्यो, ए लाग्यो रंग, रंग लाग्यो
रंग लाग्यो मारे करवुं छे उपधान,धरवुं ध्यान रे
के मारे भीतरमां ठरवुं छे
भाव जाग्यो मारे पामवा छे भगवान, धरवुं ध्यान रे
के मारे भीतरमां ठरवुं छे
मारे हवे करवुं छे उपधान हो (२)
भाव जाग्यो मारे पामवा छे भगवान, धरवुं ध्यान रे
के मारे भीतरमां ठरवुं छे
मारे हवे करवुं छे उपधान हो (२)
भाव जाग्यो मारे पामवा छे भगवान, धरवुं ध्यान रे
के मारे, हो मारे,हां मारे भीतरमां ठरवुं छे
रंग लाग्यो मारे करवुं छे उपधान
भाव जाग्यो मारे पामवा छे भगवान
शांति मळे साधनामां जी हो जी,साद एवो गुरुदेवनो
समताभिनो स्पर्श मारे माणवो वीतरागनो
के मारे भीतरमां ठरवुं छे
रंग लाग्यो मारे करवुं छे उपधान(२)
भाव जाग्यो मारे पामवा छे भगवान(२)
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