Raag marubihag |bada khyaal |vilambit Tilwada|vanita s
Автор: Learn with Soham Swar
Загружено: 2025-12-15
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राग मारू बिहाग कल्याण थाट का एक मनमोहक रात्रि राग है, जो राग विहाग और मारू राग का मिश्रण माना जाता है, इस राग के आरोह में 'रे' और 'ध' वर्जित (औडव) होते हैं और अवरोह में सभी स्वर (संपूर्ण) लगते हैं,|दो मध्यम का प्रयोग होता है |वादी स्वर 'ग' (गंधार) और संवादी 'नी' (निषाद) होता है, कुछ गुणीजन प सा वादी संवादी मानते है |इसे रात्रि के दूसरे प्रहर में गाया जाता है, |यह श्रृंगार और प्रेम भावोंरस परिपोष करता है| म ग रे सा गाते समय रिषभ को सा का स्पर्श देना चहिये। मारू बिहाग का वर्तमान स्वरूप जयपुर अतरौली घराना के संस्थापक उस्ताद अल्लादिया खान से जुड़ा है
बंदिश रचनाकार
डॉ सुचेता बिडकर
स्थाई : जियरा माने ना मोरे पियाबीन
सखी मैं का करूँ कैसे जिया को समझाऊ
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