Raag Madhukans | taal jhaptaal | Madhyalay bandish | Tutorial |vanita s
Автор: Learn with Soham Swar
Загружено: 2026-01-09
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मधुकौंस राग को काफी थाट जन्य माना गया है। इसमें दोनों गंधार व निषाद कोमलतथा मध्यम प्रयोग किये गये हैं। इस राग में रिषभ व धैवत वर्जित है |गायन समय रात्रि का द्वितीय प्रहर है। वादी प और संवादी सा है। जाति औडव है।
राग मधुकौंस अपेक्षाकृत नया राग है और अत्यंत प्रभावशाली वातावरण बनाने के कारण, कम समय में ही पर्याप्त प्रचलन में आ गया है। गंधार कोमल से मध्यम तीव्र का लगाव, इस राग में व्यग्रता का वातावरण पैदा करता है जो विरहणी की व्यग्रता को दर्शाता हुआ प्रतीत होता है। इसलिए इस राग में विरह रस की बंदिशें अधिक उपयक्त होती हैं। यह मींड प्रधान राग है। गुणीजन इस राग को राग मधुवंती और राग मालकौंस का मिश्रण मानते हैं।
रचनाकार डॉ सुचेता बीडकर
स्थायी : करत बरजोरी कान्ह मोसे आली
कैसे जमुना तीर जाऊ |
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