भगवान क्या चाहते हैं?"(Bhagwan kya chahte hain?)
Автор: भक्ति 📿ज्ञान📿
Загружено: 2026-01-01
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महाराज जी कहते हैं कि भगवान केवल भाव के भूखे हैं। आप उन्हें छप्पन भोग खिलाएं या केवल एक तुलसी का पत्ता अर्पित करें, अगर उसमें प्रेम नहीं है, तो वे उसे स्वीकार नहीं करते। भगवान चाहते हैं कि आप उन्हें अपना 'परम संबंधी' (पिता, मित्र या स्वामी) मानकर प्रेम करें।
2. निर्मल मन (कपट रहित हृदय):
महाराज जी अक्सर रामचरितमानस की इस चौपाई का उदाहरण देते हैं:
"निर्मल मन जन सो मोहि पावा, मोहि कपट छल छिद्र न भावा।"
अर्थात, भगवान को वह व्यक्ति पसंद है जिसका मन साफ हो। भगवान चाहते हैं कि हमारे अंदर किसी के प्रति ईर्ष्या, द्वेष या छल न हो।
3. अनन्य शरणागति (Surrender):
भगवान चाहते हैं कि जीव यह स्वीकार कर ले कि "मैं भगवान का हूँ और भगवान मेरे हैं।" जब हम अपनी बुद्धि और अहंकार को उनके चरणों में त्याग देते हैं और पूरी तरह उन पर आश्रित हो जाते हैं, तब वे प्रसन्न होते हैं।
4. निरंतर नाम जप:
प्रेमानंद जी महाराज का सबसे मुख्य उपदेश है—नाम जप। भगवान चाहते हैं कि आप हर समय (चलते-फिरते, खाते-पीते) उनके नाम का स्मरण करें (जैसे: राधा-राधा)। यह नाम जप ही हमारे हृदय की गंदगी को साफ करता है।
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