श्री धोपेश्वर नाथ सिद्धपीठ मंदिर | बरेली उत्तरप्रदेश | शिव मंदिर | 4K | दर्शन 🙏
Автор: Tilak
Загружено: 2023-04-10
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लेखक: रमन द्विवेदी
भक्तों नमस्कार! प्रणाम! और सादर अभिनन्दन! आज हम आपको अपने लोकप्रिय कार्यक्रम दर्शन के माध्यम से जिस मंदिर की यात्रा करवाने जा रहे हैं वो ऐसा मंदिर है जिसमें महाभारत काल के शिवलिंग विराजमान है, जहाँ श्रद्धा और विश्वास के साथ जाने वाला कोई भी व्यक्ति खाली हाथ नहीं लौटता, जहाँ मिलती है हर किसी को मुंह माँगी मुरादें और जहाँ सिद्ध होते हैं सभी के मनोरथ। भक्तों हम बात कर रहे हैं नाथनगरी के नाम से विख्यात उत्तरप्रदेश के बरेली शहर के धोपेश्वरनाथ मंदिर की।
मंदिर के बारे में:
भक्तों देश और प्रदेश की राजधानी के बीचो बीच स्थित नाथनगरी बरेली में देवाधिदेव महादेव के कई प्राचीन और सुप्रसिद्ध मंदिर अवस्थित हैं। जिनमें से प्रमुख हैं पूर्व दिशा में बनखण्डी नाथ, दक्षिण में तपेश्वर नाथ, आग्नेय में धोपेश्वर नाथ,उत्तर पश्चिम में अलखनाथ, पश्चिम में मढ़ीनाथ और उत्तर में त्रिवटी नाथ मन्दिर स्थित है। बरेली कैंट स्थित बाबा धोपेश्वरनाथ मन्दिर एक ऐसा ही सिद्धस्थल है जहाँ शिव और पार्वती एक ही शिवलिंग में विराजमान हैं। यहाँ सच्चे मन से की गई हर कामना पूर्ण होती है।
पौराणिक कथाएँ:
भक्तों धोपेश्वर नाथ मंदिर से जुडी एक पौराणिक कथा के अनुसार - महाभारत युद्ध की केंद्रबिंदु और पंचकन्याओं में से एक रहीं द्रौपदी- जिन्हें अग्निसुता, कृष्णा, पांचाली, द्रुपदपुत्री आदि नामों से भी जाना जाता है। उनके जन्म से पूर्व उनके पिता पांचाल नरेश राजा द्रुपद ने संतान प्राप्ति की कामना से पुत्र कामेष्ठि यज्ञ इसी स्थान पर किया था। उसी यज्ञ से द्रौपदी और भाई धृष्टदयुम्न का जन्म हुआ था। महाभारत काल में, युद्ध में पांडवों के विजय की कामना करते हुए द्रौपदी एवं धृष्टद्युम्न ने यहीं गुप्त यज्ञ किया था जिसके परिणाम स्वरुप पांडवों को महाभारत युद्ध में विजय प्राप्त हुई थी।
भक्तों दूसरी पौराणिक कथा के अनुसार - भीष्म पितामह ने काशिराज पुत्री अम्बा और उनकी दोनों बहनों अम्बिका और अम्बालिका का स्वयंवर से हरण कर लिया तो अंबा अपने मन चाहे वर का वरण नहीं कर पाईं। अतः उन्होंने कहा कि जिसने मेरा हरण किया है वही मेरा वरण भी करे। किन्तु भीष्म पितामह ने आजीवन ब्रह्मचर्य की प्रतिज्ञा से बंधे होने के कारण अम्बा से विवाह करना स्वीकार नहीं किया। इसलिए प्रतिशोध की अग्नि में झुलसती अम्बा ने भीष्म पितामह के गुरु महर्षि परशुराम से अपनी सारी कथा सुनाते हुए उनसे न्याय की मांग की। जिसके कारण महर्षि परशुराम और भीष्म पितामह के बीच भयंकर युद्ध प्रारंभ हो गया। कहा जाता है कि गुरु शिष्य का ये भयंकर युद्ध 23 दिनों तक अनिर्णीत चलता रहा। फिर दोनों ने दिव्यास्त्रों का प्रयोग करना प्रारम्भ कर दिया, इस युद्ध को रोकने के लिए सभी देवताओं के साथ साथ भगवान् शिव को भी बीच में आना पड़ा। युद्ध रुकने के पश्चात् महर्षि परशुराम और भीष पितामह की प्रार्थना पर भगवान भोलेनाथ शिवलिंग के रूप में यहीं विराजमान हो गए।
भक्तों इस मंदिर से जुडी एक तीसरी पौराणिक कथा भी है जिसके अनुसार –महर्षि अत्रि ऋषि के शिष्य धूम्र ऋषि अपने शिष्यों के साथ तीर्थ यात्रा पर जा रहे थे। यहाँ की प्राकृतिक सुन्दरता को देख कर वो यहीं रुक गए और यहीं आश्रम बना कर तपस्या करने का निर्णय लिया। धूम्र ऋषि ने यहाँ रहकर भगवान शिव की कठोर तपस्या की उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें दर्शन दिए और वर मांगने को कहा तो धूम्र ऋषि ने जनकल्याण हेतु उन्हें सदा के लिए यही विराजमान होने की प्रार्थना की। धूम्र ऋषि की जनकल्याण की भावना को देख कर शंकर जी प्रसन्न हुए उन्होंने ऋषि को आशीर्वाद दिया कि इस लिंग का पूजन तुम्हारे नाम से ही होगा। जिसके बाद से यह जगह धूम्रेश्वर नाथ के नाम से पूजी जाने लगी धूम्र ऋषि का नाम महाभारत में भी वर्णित है किन्तु वर्तमान समय में अपभ्रंश होकर यह मन्दिर धोपेश्वर नाथ मन्दिर के नाम से जाना जाता है।
भक्तों धोपेश्वर नाथ मंदिर की एक चौथी पौराणिक कथा भी है जिसके अनुसार -द्रोपदी के गुरू धूप ऋषि द्वापर युग में यहीं पर तपस्या करते थे। इसीलिए यहाँ प्रतिष्ठित शिवलिंग को धोपेश्वर नाथ तथा यह मंदिर धोपेश्वर नाथ मंदिर के नाम से प्रसिद्ध हुआ। कई श्रद्धालुओं द्वारा इस मंदिर को धोपा मंदिर के नाम से भी जाना जाता है।
मंदिर का इतिहास:
भक्तों धोपेश्वरनाथ मंदिर हजारों वर्षों पुराना है। मंदिर के पास एक आलेख पट लगा हुआ है जिसके अनुसार धोपेश्वरनाथ मंदिर 5500 वर्षों से अधिक प्राचीन है। यद्यपि मंदिर की स्थापना, इतिहास और इसके इतना प्राचीन होने का कोई प्रमाण नहीं है।
तालाब/कुंड:
भक्तों धोपेश्वर मंदिर परिसर में एक कुंड (तालाब) बना हुआ है। कहा जाता है, कि इस कुंड में स्नान करने से त्वचा संबंधी सभी रोग पूर्णतः ठीक होते हैं। तालाब के सामने प्रतिष्ठित हनुमान जी की एक विशाल मूर्ति भक्तों के विशेष आकर्षण का केंद्र है।
नवग्रह वाटिका:
भक्तों धोपेश्वर मंदिर के पृष्ठ बाग में एक वाटिका है जिसे नवग्रह वाटिका कहा जाता है। इस वाटिका की प्रमुख विशेषता यह है कि इसमें जन जीवन को प्रभावित करनेवाली द्वादश राशियों, सभी राशियों के कारक नवों ग्रह और नवों ग्रहों के अनुसार पौधे लगाए गए हैं। ये नवग्रह वाटिका भक्तों को विशेष रूप से आकर्षित करती है। नवग्रहों के ठीक पास में हनुमान जी का मंदिर हैं। नवग्रह वाटिका आनेवाले भक्तगण हनुमान जी का दर्शन पूजन भी करते हैं।
मंदिर परिसर:
भक्तों धोपेश्वर नाथ मंदिर परिसर में भगवान् धोपेश्वर नाथ मंदिर के अतिरिक्त श्री गणेशजी, श्री सरस्वती माता, श्री रामदरबार, श्री राधा कृष्ण जी, श्री हनुमान जी, साईं बाबा और वैष्णो माता आदि के मंदिर स्थापित हैं।
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि तिलक किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
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