उत्तर रामायण - EP 11 - राम को लोकापवाद से बचाने के लिये सीता का कठोर निर्णय
Автор: Ramayan
Загружено: 2024-12-03
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Uttar Ramayan - Episode 11 - Sita's tough decision to save Ram from populism.
अयोध्या की प्रजा निष्ठुरता से यह विवाद खड़ा करती है कि रावण के घर में दस माह तक रहने के पर भी सीता को राजा राम ने महारानी का दर्जा देकर महल में स्थान दिया हुआ है। दासी से यह सूचना सीता तक पहुँच चुकी है और दासी द्वारा कहे गये शब्द हर समय सीता को कचोटते रहते हैं। सीता कुछ कठोर निर्णय लेती हैं। वह जगदम्बा माता के मन्दिर में जाती हैं। देवी प्रतिमा के समक्ष उन्हें याद आता है कि एक दिन उन्होंने देवी के गौरी स्वरूप के समक्ष विनती की थी कि उन्हें श्रीराम पति के रूप में प्राप्त हों। विधि का विधान देखिये, आज सीता उनके शक्ति स्वरूप के समक्ष हाथ जोड़ कर विनती करती हैं कि देवी माँ उन्हें शक्ति दे कि वे लोकापवाद से बचाने के लिये अपने पति का त्याग कर सकें। सीता के अन्तर्मन को आभास होता है कि उन्हें देवी माँ का आशीर्वाद प्राप्त हो गया है और पति का घर छोड़ने का उनका निर्णय आगे चलकर जग द्वारा सराहा जायेगा। उस रात सीता राम पर यह भेद प्रकट करती हैं कि उन्हें पता चल चुका है कि प्रजा सीता को अपवित्र समझती है। राम कहते हैं कि वह प्रजा के मत से सहमत नहीं है। इस पर सीता कहती हैं कि अयोध्या का राज सिंहासन पवित्र रहना भी चाहिये और पवित्र दिखना भी चाहिये इसलिये अब सीता त्याग करना अपरिहार्य हो गया है। सीता कहती हैं कि राम सीता का त्याग न करें बल्कि सीता राम का त्याग करेगी। इस पर राम कहते हैं कि सीता ही नहीं, राम भी राजमहल से बाहर जायेंगे। सीता कहती हैं कि राजा होने के कारण राम प्रजा के प्रति अपने दायित्वों से इस प्रकार मुख मोड़ कर नहीं जा सकते। राजा राम अपनी निर्दोष पत्नी को यूँ दण्डित करने से इनकार कर देते हैं। तब सीता राम को उनके पूर्वजों के कक्ष में ले जाती हैं। सीता राम को राजतिलक के समय पूर्वजों के समक्ष ली गयी उनकी शपथ का स्मरण कराती हैं। सीता राम को उनके पूर्वज राजा हरिश्चन्द्र और राजा शिवि द्वारा धर्म और कुल कीर्ति की रक्षा के लिये दिये गये बलिदानों की याद दिलाती हैं। सीता कहती हैं कि कुल कीर्ति की रक्षा के लिये अब उन्हें परीक्षा देनी है। राम किंकर्तव्यविमूढ़ दिखते हैं। सीता अपने पति की सौगंध खाते हुए अपने दोनों हाथ उठाकर रघुवंश की महान आत्माओं को वचन देती हैं कि आज के पश्चात उनकी छाया भी उनके पवित्र राजकुल पर नहीं पड़ेगी। वह अपना नाम त्यागने की भी घोषणा करती हैं और यह भी वचन देती हैं कि वे अपनी गर्भस्थ सन्तान को इस योग्य बनायेंगी कि वह रघुकल के नाम, वीरता और कीर्ति को आगे बढ़ा सके। सीता कहती हैं कि एक दिन उनकी सन्तान की वीरता के सामने अयोध्या की प्रजा गिड़गिड़ाकर उनकी पवित्रता को स्वीकार करेगी और घुटने पर गिरकर क्षमा याचना करेगी। सीता राम के चरणों में झुककर निवेदन करती हैं कि पति के आज्ञा के बिना वे कुछ भी नहीं कर सकती हैं।
उत्तर रामायण में लव कुश की कहानी को दर्शाया गया है। जिसमें माँ सीता को श्री राम त्याग देते हैं और माँ सीता महाऋषि वाल्मीकि के आश्रम में जाकर रहने लगती हैं। माँ सीता वहाँ लव कुश को जन्म देती हैं। लव कुश उसी आश्रम में बड़े होते हैं और गुरु वाल्मीकि से शिक्षा दीक्षा लेते हैं। कैसे लव कुश श्री राम और माँ सीता को मिलाते हैं देखे सम्पूर्ण उत्तर रामायण के सभी एपिसोड सिर्फ़ तिलक YouTube चैनल पर।
रामायण एक भारतीय टेलीविजन श्रृंखला है जो इसी नाम के प्राचीन भारतीय संस्कृत महाकाव्य पर आधारित है। यह श्रृंखला मूल रूप से 1987 और 1988 के बीच दूरदर्शन पर प्रसारित हुई थी।
इस श्रृंखला के निर्माण, लेखन और निर्देशन का श्रेय श्री रामानंद सागर को जाता है। यह श्रृंखला मुख्य रूप से वाल्मीकि रचित 'रामायण' और तुलसीदास रचित 'रामचरितमानस' पर आधारित है।
निर्माता और निर्देशक - रामानंद सागर
सहयोगी निर्देशक - आनंद सागर, मोती सागर
कार्यकारी निर्माता - सुभाष सागर, प्रेम सागर
मुख्य तकनीकी सलाहकार - ज्योति सागर
पटकथा और संवाद - रामानंद सागर
संगीत - रविंद्र जैन
शीर्षक गीत - जयदेव
अनुसंधान और अनुकूलन - फनी मजूमदार, विष्णु मेहरोत्रा
संपादक - सुभाष सहगल
कैमरामैन - अजीत नाइक
प्रकाश - राम मडिक्कर
साउंड रिकॉर्डिस्ट - श्रीपाद, ई रुद्र
वीडियो रिकॉर्डिस्ट - शरद मुक्न्नवार
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