माँ ने मेरी टिकट के पैसे बहन की फर्स्ट क्लास पर उड़ा दिए, फिर मैंने अपना पूरा परिवार छोड़ दिया
Автор: इंसाफ़ का बदला
Загружено: 2025-11-28
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माँ ने मुझसे तीन लाख रुपये लेकर कहा था, “तू तो सब संभाल लेती है न…”
उसी पैसे से उन्होंने मेरी टिकट नहीं, मेरी छोटी बहन की फर्स्ट क्लास सीट खरीद दी – और मुझे शादी में एक सस्ते हॉस्टल में भेजने की प्लानिंग कर ली। उस दिन मुझे समझ आ गया कि मैं उनके लिए बेटी नहीं, बस एक “फ्री सर्विस” हूँ।
इस सच्ची जैसी लगने वाली कहानी में एक ज़िम्मेदार बेटी बताती है कैसे उसने अपने ही परिवार, अपने बॉस और पूरी ज़िन्दगी के साथ एक आखिरी बार हिसाब बराबर किया – बिना चिल्लाए, बिना ड्रामे के, सिर्फ़ दिमाग, हिम्मत और साफ़ सीमाओं के साथ।
अगर आपको भी कभी लगा है कि घर में हर काम, हर बिल, हर समस्या सिर्फ़ आप पर ही डाल दी जाती है, तो ये कहानी आपके लिए है।
📝 कमेंट में लिखिए – “मैं किसी की मशीन नहीं, इंसान हूँ” – ताकि पता चले कि आप भी अब अपनी ज़िन्दगी अपने नियमों से जीना चाहते हैं।
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