सब तीरथ गुरु चरनन लारे | Sab Teerath Guru Charanan Lare | Sehjo Bai Bhajan | By Kahat Kabir Official
Автор: कहत कबीर
Загружено: 2026-01-14
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यह भजन सहजो बाई जी की निर्गुण संतवाणी का अत्यंत शुद्ध और गहन उदाहरण है।
इस भजन में सहजो बाई जी स्पष्ट रूप से कहती हैं कि गुरु के चरण ही सभी तीर्थों का सार हैं।
जहाँ गुरु के चरणों में प्रेम, समर्पण और दृढ़ विश्वास है, वहाँ किसी अन्य देव, मूर्ति या बाहरी साधना की आवश्यकता नहीं रहती।
गुरु के चरणों में ध्यान, आशा-निराशा, लाभ-हानि, सुख-दुख—सब समर्पित हो जाते हैं।
जो गुरु के चरणों से जुड़ जाता है, वही भव-बंधन से तर जाता है।
गुरु ही जीवन का आधार हैं, प्राणों से भी अधिक प्रिय हैं और वही मुक्ति का सच्चा मार्ग दिखाते हैं।
“कहत कबीर” चैनल ऐसे ही संतों की अमृतवाणी को आज की पीढ़ी तक सरल, शुद्ध और भावपूर्ण रूप में पहुँचाने का प्रयास करता है।
(भावार्थ)
1️⃣ सब तीरथ गुरु चरनन लारे।
चरन बर्त दृढ़ सदा हमारे ॥
सहजो बाई जी कहती हैं कि सभी तीर्थ गुरु के चरणों में ही समाहित हैं।
उन्होंने अपने जीवन का व्रत गुरु-चरणों को दृढ़ता से थामना बना लिया है—यही उनकी साधना है।
2️⃣ चरन कँवल की निसदिन पूजा।
परसु और देव नहिं दूजा ॥
वे दिन-रात गुरु के कमल-चरणों की पूजा करती हैं।
उनके लिए गुरु के अतिरिक्त कोई दूसरा देव या आश्रय नहीं है।
3️⃣ इष्ट हमारे गुरु के चरना।
गुरु के चरन ध्यान हूँ करना ॥
गुरु के चरण ही उनका इष्ट (आराध्य) हैं।
उनका ध्यान, स्मरण और साधना केवल गुरु-चरणों पर केंद्रित है।
4️⃣ गुरु के चरन लगे सो तारे।
गुरु के चरन प्रान सूँ प्यारे ॥
जो भी गुरु-चरणों से जुड़ता है, वह संसार-बंधन से तर जाता है।
गुरु के चरण उन्हें अपने प्राणों से भी अधिक प्रिय हैं।
5️⃣ आसा मनसा और करमना।
गुरु के चरन प्रेम चित धरना ॥
आशा (इच्छा), मनसा (विचार) और करमना (कर्म)—
तीनों स्तरों पर उन्होंने गुरु-चरणों में प्रेमपूर्वक चित्त स्थिर कर दिया है।
6️⃣ गुरु के चरन होय सो होना।
हानि लाभ कै दुख सुख मरना ॥
जो कुछ गुरु-चरणों की इच्छा से हो, वही स्वीकार है।
हानि-लाभ, सुख-दुख—इन द्वंद्वों के प्रति उनका अहंकार मर चुका है।
7️⃣ रनजीता गुरुचरन तुम्हारे।
जीवन प्रान अधार हमारे ॥
(यहाँ ‘रनजीता’ गुरु का नाम/संकेत है)
गुरु-चरण ही उनके जीवन और प्राणों का आधार हैं—यही उनकी शक्ति है।
8️⃣ गुरु के चरन मुक्ति फलदायक।
सहजो गुरु के चरन सहायक ॥
गुरु के चरण मुक्ति का फल देने वाले हैं।
सहजो बाई जी कहती हैं—हर अवस्था में गुरु-चरण ही हमारे सहायक हैं।
🌱 भजन का केंद्रीय संदेश
गुरु-चरण ही सर्वोच्च तीर्थ हैं
पूर्ण समर्पण से द्वंद्व समाप्त होते हैं
आशा-विचार-कर्म—तीनों में गुरु-प्रेम की स्थापना
मुक्ति का मार्ग गुरु-चरणों से होकर जाता है
This profound Nirgun bhajan by Sehjo Bai Ji glorifies the supreme importance of the Guru’s feet.
She teaches that the Guru’s charan (feet) are greater than all pilgrimages and rituals combined.
When devotion, love, and surrender are firmly placed at the Guru’s feet, no external worship or symbols are needed.
By surrendering hope, fear, gain, loss, joy, and sorrow at the Guru’s feet, the seeker attains inner freedom.
The Guru becomes the true support of life and the giver of liberation.
Kahat Kabir channel brings the timeless wisdom of Indian saints through soulful and authentic presentations.
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