ब्रह्म जी में समय अश्वत्थामा का ब्रह्मषिर अस्त्र | महाभारत एक धर्म युद्ध
Автор: Tilak
Загружено: 2023-10-29
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भक्त को भगवान से और जिज्ञासु को ज्ञान से जोड़ने वाला एक अनोखा अनुभव। तिलक प्रस्तुत करते हैं दिव्य भूमि भारत के प्रसिद्ध धार्मिक स्थानों के अलौकिक दर्शन। दिव्य स्थलों की तीर्थ यात्रा और संपूर्ण भागवत दर्शन का आनंद। दर्शन दो भगवान!
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वेदव्यास जी दोनों अस्त्रों के बीच में आकर उन्हें आपस में टकराने से रोक देते हैं और दोनों को अपना अस्त्र वापस ले लेने के लिए कहते हैं अर्जुन उनकी बात माँ कर अपना अस्त्र वापस ले लेता है। लेकिन जब अश्वत्थामा उन्हें कहता अहि की मैं इस अस्त्र को वापस लेने की विद्या नहीं जानता। वेदव्यास जी अश्वत्थामा को कहते हैं की तुम इसे यदि वापस नहीं ले सकते तो तुम इसे पृथ्वी के उस हिस्से पर मोड़ दो जहां कोई भी जीव नहीं है और इसके बदले में तुम्हें पांडवों से अभय दान दिलवाता हूँ। श्री कृष्ण पांडवों से अश्वत्थामा को अभ्यदान देने के बदले उसकी दिव्य मणि को माँगते हैं जो की उसे सिर के भीतर थी जिस से उसे ना कभी भूक लगती थी और वह राज मुक्त रहता था। अश्वत्थामा अपने ब्रह्मषिर अभिमनयु की पत्नी उत्तरा के गर्भ की ओर मोड़ देता है। श्री कृष्ण उत्तरा के गर्भ की रक्षा करने के लिए अपने सुदर्शन चक्र को भेजते हैं। श्री कृष्ण ब्रह्मा जी से कहते हैं की आप अपने अस्त्र को वापस ले लें क्योंकि अश्वत्थामा ने इसका प्रयोग ग़लत कार्य के लिए किया है। ब्रह्मा जी अपने अस्त्र को वापस ले लेते हैं।
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