बन्ध क्या हैं, और कितने प्रकार के होते हैं | योगाचार्य दानवीर विद्यालंकार
Автор: samyoga foundation
Загружено: 2020-09-29
Просмотров: 6155
बन्ध के विषय में.....
बन्ध का अर्थ है ताला लगाना, बन्द करना, रोक देना। बन्ध के अभ्यास में, शरीर के विशेष क्षेत्र में ऊर्जा प्रवाह को रोक दिया जाता है। जब बंध खुल जाता है तो ऊर्जा शरीर में अधिक वेग से वर्धित दबाव के साथ प्रवाहित होती है।
बन्ध चार प्रकार के होते हैं।
मूल बन्ध : गुदा संबंधी रोक।
उड्डियान बन्ध : मध्य पेट को उठाना।
जालन्धर बन्ध : ठोड्डी को बन्द करना।
महाबन्ध : एक ही समय पर तीनों बन्धों का अभ्यास।
पूरा वीडियो अंत तक देखिय और कमेंट सेक्शन में अपने विचार बताएं।
Доступные форматы для скачивания:
Скачать видео mp4
-
Информация по загрузке: