सुहाग गीत | सुहाग | कामण सुहाग | छोटी सी तळाई | suhag geet | suhag kaman | सुहाग कामण | kaman geet
Автор: Jangid Lok Geet
Загружено: 2026-01-06
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सुहाग गीत
छोटी सी तळाई में झीणो झीणो पाणी
झीणो झीणो पाणी ओ छम छम बाजे
छोटी सी तळाई में झीणो झीणो पाणी
झीणो झीणो पाणी ओ छम छम बाजे
लाडी रो सवाग मानै बौत प्यारो लागे
बनी रो सवाग मानै घणो आछ्यो लागे
द्यो मारी दाद्यां माने अमर सवाग
औरां ने देस्यां लाडी पुड़ी ए बंधाय
द्यो मारी माता माने अमर सवाग
औरां ने देस्यां लाडी पुड़ी ए बंधाय
अपणी लाडी ने देस्यां छाब भर्यो
अपणी बनड़ी ने देस्यां छाब भर्यो
पूड़ी को सवाग लाडी उड़ उड़ जाय
छाब भर्यो ए लडवण अमर सवाग
पूड़ी को सुहाग लाडी उड़ उड़ जाय
छाब भर्यो ए लाडी अमर सवाग
छोटी सी तळाई में झीणो झीणो पाणी
झीणो झीणो पाणी ओ छम छम बाजे
छोटी सी तळाई में झीणो झीणो पाणी
झीणो झीणो पाणी ओ छम छम बाजे
लाडी रो सुहाग मानै बौत प्यारो लागे
बनी रो सुहाग मानै घणो प्यारो लागे
द्यो मारी कक्यां माने अमर सवाग
औरां ने देस्यां लाडी पुड़ी ए बंधाय
द्यो मारी भाभ्यां माने अमर सवाग
औरां ने देस्यां लाडी पुड़ी ए बंधाय
अपणी लाडी ने देस्यां छाब भर्यो
अपणी बनड़ी ने देस्यां छाब भर्यो
पूड़ी को सवाग लाडी उड़ उड़ जाय
छाब भर्यो ए लडवण अमर सवाग
पूड़ी को सुहाग लाडी उड़ उड़ जाय
छाब भर्यो ए लाडी अमर सवाग
छोटी सी तळाई में झीणो झीणो पाणी
झीणो झीणो पाणी ओ छम छम बाजे
छोटी सी तळाई में झीणो झीणो पाणी
झीणो झीणो पाणी ओ छम छम बाजे
लाडी रो सवाग मानै बौत प्यारो लागे
बनी रो सवाग मानै घणो प्यारो लागे
यह राजस्थानी “सुहाग गीत” विवाह अवसर पर गाया जाने वाला पारंपरिक लोकगीत है, जो नारी के सौभाग्य, प्रेम और पारिवारिक भावनाओं को अभिव्यक्त करता है। गीत की पंक्तियाँ — “छोटी सी तळाई में झीणो झीणो पाणी, झीणो झीणो पाणी ओ छम छम बाजे” — में जीवन की कोमलता, पवित्रता और उल्लास का प्रतीकात्मक चित्रण है। इसमें झीणे पानी की उपमा नवविवाहिता के स्नेह और लज्जा से की गई है।
गीत में “लाडी” और “बनी” शब्दों से क्रमशः दुल्हन और उसकी सखी का उल्लेख होता है, जो सुहाग की पवित्रता और नारी-सौंदर्य की प्रशंसा करते हैं — “लाडी रो सुहाग मानै बौत प्यारो लागे, बनी रो सुहाग मानै घणो प्यारो लागे।” यह पंक्ति स्त्री के सौभाग्य को देवत्व और आशीर्वाद के रूप में दर्शाती है।
गीत का भाव केवल सजावट या रस्म तक सीमित नहीं, बल्कि इसमें माताओं, ककियों, भाभियों द्वारा दी जाने वाली शुभकामनाएँ भी गूँजती हैं — “द्यो मारी दाद्यां माने अमर सवाग।” यह सामाजिक एकता और पारिवारिक स्नेह का परिचायक है। यह गीत राजस्थानी लोक संस्कृति की आत्मा को उजागर करता है — जहाँ नारी का सुहाग केवल व्यक्तिगत सुख नहीं, बल्कि पूरे परिवार और समाज की मंगल भावना से जुड़ा होता है।
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