नारेलां रो रूंख प्यारो लागे | बधावा | Badhava geet | प्यारा बधावा | बधावो | badhavo | shadi geet
Автор: Jangid Lok Geet
Загружено: 2025-02-01
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/ @jangidlokgeet
बधावा गीत- नारेलां रो रूंख
म्हाने नारेलां रो रूंख प्यारो लागे
ईरी छायां लुल लहरावे जियो
म्हाने इसड़ो बधावो प्यारो लागे।
म्हाने सुसरा जीरी बोली प्यारी लागे
म्हाने बींदणी कह बतलावे जियो। म्हाने इसड़ो...
म्हाने सासूजी की बोली प्यारी लागे
म्हाने बवू कह बतलावे जियो। म्हाने इसड़ो...
म्हाने देवरियो घणो प्यारो लागे
म्हाने भावज कह बतलावे जियो। म्हाने इसड़ो...
म्हाने सायब जीरी बोली मीठी लागे
म्हाने मारुणि कह बतलावे जियो। म्हाने इसड़ो...
म्हाने नारेलां रो रूंख प्यारो लागे
ईरी छायां लुल लहरावे जियो
म्हाने इसड़ो बधावो प्यारो लागे
राजस्थानी संस्कृति में ब्याव कौरो एक समारो कोनि, कौरो उछल कूद नीं होवे, पण खुशी रो त्योहार है। यांमें गायेड़ा पारंपरिक गीतड़लां रो महत्त्व बाळमहुच है। अस्योई ही एक गीत है- 'म्हाने नारेलां रो रूंख प्यारो लागे।' ईने बधावा गीत केवे है, जको ब्याव रा मौका पर वर-वधू अर सगला परिवार ने शुभकामनां देवां खातर गाया जावे है। इण गीत मं परिवार का रिश्ता रो महत्त्व बतायो गयो है। यो गीत सास, ससुर, देवर, भावज अर पूरा परिवार के प्रति प्रेम अर अपनत्व ने उजागर करे है। इकी मिठास अर सुर ब्याव ने यादगार बना देवें है।
जांगिड़ लोक गीत
रामविलास जांगिड़ अजमेर द्वारा स्थापित 'राजस्थानी लोक गीत रस धारा' प्लेटफॉर्म का उद्देश्य महिलाओं द्वारा गाए जाने वाले बहुत पुराने राजस्थानी लोक गीतों की समृद्ध परंपरा को संरक्षित, विकसित और पल्लवित करना है। इस मंच पर राजस्थानी लोक गीत, भाषा और संस्कृति के अनमोल रत्नों को प्रदर्शित किया जाता है, ताकि युवा पीढ़ी इनसे जुड़ सके और लोक गीतों के माध्यम से राज्य की सांस्कृतिक धरोहर को समझते हुए इसे संरक्षित कर सके। यह प्लेटफार्म राजस्थान के ग्रामीण जीवन, लोक संगीत और पारंपरिक गीतों का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है, जो लोक कला के प्रति समझ और सम्मान बढ़ाने में बड़ा सहायक है।
-- इंदिरा जांगिड़ (9413 601939)
प्रबंधक, जांगिड़ लोक रस धारा, 18, उत्तम नगर, घूघरा, अजमेर (राजस्थान) 305023
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