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सफलता और असफलता में शांत कैसे रहें? | Bhagavad Gita Chapter 2 Verse 48

Автор: GYAN SANGRAH

Загружено: 2026-01-02

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सफलता और असफलता में शांत कैसे रहें? | Bhagavad Gita Chapter 2 Verse 48

Description (विवरण)

नमस्ते मित्रों! श्रीमद्भगवद्गीता के इस वीडियो में हम अध्याय 2, श्लोक 48 की व्याख्या करेंगे। भगवान कृष्ण अर्जुन को बताते हैं कि असल में 'योग' क्या है और एक कर्मयोगी को किस मानसिक अवस्था में अपना कार्य करना चाहिए।

इस वीडियो में आप सीखेंगे:

'समत्वं योग उच्यते' का वास्तविक अर्थ क्या है?

सफलता और असफलता (सिद्धि-असिद्धि) में मन को संतुलित कैसे रखें?

आसक्ति (Attachment) को छोड़कर कर्म कैसे करें?

आज के तनावपूर्ण जीवन में इस श्लोक की प्रासंगिकता।

श्लोक: योगस्थ: कुरु कर्माणि सङ्गं त्यक्त्वा धनञ्जय। सिद्ध्यसिद्ध्यो: समो भूत्वा समत्वं योग उच्यते॥

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सफलता और असफलता में शांत कैसे रहें? | Bhagavad Gita Chapter 2 Verse 48

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