Nijdham

पचवीस पख छे आपणां, तेमां कीजे रंग विलास ।
प्रगट कह्यां छे पाधरा, तमे ग्रहजो सहु साथ ।। ૭९।।१ रास ग्रन्थ
दिव्य परमधाम के पच्चीस पक्ष हमारे लिए हैं ,इनमें आनंद विलास कीजिए ।परमधाम के पच्चीस पक्षों कि शोभा को आप ह्रिदय में धारण कीजिए ।परमधाम के पच्चीस पक्ष ही हमारी वास्तविक सम्पत्ति हैं ।परमधाम के पच्चीस पक्षों में धाम धनि ,पूर्ण ब्रह्म परमात्मा के साथ रमण कीजिए ,अखंड सुख लीजिए ।